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उदयपुर, राजकोट के पालतू श्वानों का अहमदाबाद के श्वान श्मशानघर में हुआ दाह संस्कार

राजस्थान के उदयपुर शहर और गुजरात के राजकोट शहर के पालतू श्वान मालिकों ने उनके पालतू श्वानों का निधन होने पर अहमदाबाद के श्वान श्मशानगृह में दाह संस्कार किया।अहमदाबाद शहर के दाणीलीमडा क्षेत्र में अहमदाबाद मनपा की ओर से शुरू किया गया देश का अपने आप में पहला सीएनजी संचालित श्वान श्मशान गृह स्थानीय श्वान […]

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अहमदाबाद के दाणीलीमडा में मृत श्वान का अंतिम संस्कार करने के बाद अस्थियां देते हुए।

राजस्थान के उदयपुर शहर और गुजरात के राजकोट शहर के पालतू श्वान मालिकों ने उनके पालतू श्वानों का निधन होने पर अहमदाबाद के श्वान श्मशानगृह में दाह संस्कार किया।अहमदाबाद शहर के दाणीलीमडा क्षेत्र में अहमदाबाद मनपा की ओर से शुरू किया गया देश का अपने आप में पहला सीएनजी संचालित श्वान श्मशान गृह स्थानीय श्वान मालिकों को ही नहीं बल्कि अन्य शहर और राज्यों के श्वान मालिकों को भी पसंद आ रहा है। रविवार तक 109 पालतू श्वानों का अंतिम संस्कार यहां किया जा चुका है।सुविधा, प्रक्रिया देख श्वान मालिक ने दिया 10 हजार का दान

अहमदाबाद महानगरपालिका के पशु उपद्रव नियंत्रण विभाग (सीएनसीडी) के अध्यक्ष नरेश राजपूत ने बताया कि राजस्थान के उदयपुर निवासी अभिजीत चौधरी कुछ दिनों पहले अपने बीमार पालतू श्वान का उपचार कराने के लिए अहमदाबाद लाए थे। श्वान की यहां मृत्यु हो गई। अभिजीत चौधरी को जब पता चला कि अहमदाबाद शहर में श्वान के अंतिम संस्कार की सुविधा है तो उन्होंने यहीं पर उसका दाह संस्कार किया। राजपूत ने बताया कि अभिजीत के श्वान दाह संस्कार की सुविधा और तरीकों से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अहमदाबाद मनपा को 10 हजार रुपए का दान भी दिया।इसी तरह राजकोट से आए एक परिवार ने भी अपने पालतू श्वान का अंतिम संस्कार अहमदाबाद में किया। गांधीनगर व अन्य जगहों से भी लोग अपने मृत श्वानों को अंतिम संस्कार के लिए लाने लगे हैं।

रविवार को मनपा के ही सीएनसीडी के निरीक्षक रामचंद्र ने भी अपने मृत श्वान का अंतिम संस्कार किया। यह दर्शाता है कि पालतू श्वानों के प्रति लोगों का भावनात्मक जुड़ाव सीमाओं से परे है।

अस्थियां लौटाने की है व्यवस्था

सीएनसीडी अध्यक्ष के अनुसार जैसे मनुष्य के अंतिम संस्कार के बाद अस्थियां लेकर उन्हें पवित्र नदी में विसर्जित किया जाता है, वैसे ही पालतू श्वानों के मालिक भी अपने श्वान की अस्थियां लेकर नदी में प्रवाहित करना चाहते हैं। उनकी अंतिम संस्कार विधि भी करते हैं। इस भावनात्मक जुड़ाव को देखते हुए श्मशान गृह में अस्थियां सौंपने की व्यवस्था भी की गई है। लोग अपने पालतू श्वानों के प्रति इतने भावुक होते हैं कि वे अंतिम संस्कार भी परिवार के सदस्य की तरह करते हैं। दाणीलीमडा स्थित यह श्मशान गृह सीएनजी से संचालित है, जिससे पर्यावरण की दृष्टि से भी इसे सुरक्षित बनाया गया है।

अहमदाबाद में बनेंगे दो और पालतू श्वान श्मशान गृह

लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए अहमदाबाद शहर में दो और श्मशान गृह बनाने की योजना है। इनमें एक पूर्व जोन में व दूसरा पश्चिम जोन में तैयार किया जाएगा। इन श्मशान गृहों में भी अस्थि कलश, सीएनजी आधारित पर्यावरण-सुरक्षा और भावनात्मक सम्मान की व्यवस्था होगी।