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गैस संकट के चलते डाकोर, आशापुरी मंदिर के भोजनालय ठप

अहमदाबाद. आणंद. मिडिल ईस्ट एशिया में ईरान, अमरीका और इज़रायल के बीच जारी युद्ध का असर अब गुजरात में जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। एलपीजी गैस की कमी के चलते राज्य के प्रसिद्ध तीर्थस्थल डाकोर में रविवार को भोजनशाला बंद करनी पड़ी। इसी तरह आणंद जिले के पीपलाव स्थित आशापुरी माता मंदिर का भोजनालय […]

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Impact of Middle East War

गैस के सिलेंडर।

अहमदाबाद. आणंद. मिडिल ईस्ट एशिया में ईरान, अमरीका और इज़रायल के बीच जारी युद्ध का असर अब गुजरात में जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। एलपीजी गैस की कमी के चलते राज्य के प्रसिद्ध तीर्थस्थल डाकोर में रविवार को भोजनशाला बंद करनी पड़ी। इसी तरह आणंद जिले के पीपलाव स्थित आशापुरी माता मंदिर का भोजनालय भी एक सप्ताह से ठप है।डाकोर रणछोड़राय मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं के लिए नि:शुल्क भोजन सेवा चलती है, लेकिन गैस की कमी के कारण इसे बंद करना पड़ा। गरीब और मध्यम वर्ग के श्रद्धालुओं को अब बाहर भोजन करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंदिर प्रशासन ने कहा है कि गैस आपूर्ति सामान्य होते ही सेवा पुनः शुरू की जाएगी।

पीपलाव आशापुरी माता मंदिर में भी भोजनालय बंद हो गया है। यहां प्रतिदिन 1000 से अधिक श्रद्धालु भोजन करते थे, जबकि रविवार और नवरात्रि जैसे अवसरों पर यह संख्या कई हजार तक पहुंच जाती थी। कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की भारी कमी के कारण भोजनालय बंद करना पड़ा। पुजारी अब माता को भोग अर्पित करने के लिए घर से भोजन तैयार कर ला रहे हैं, जबकि प्रसाद की व्यवस्था स्थानीय लोगों के सहयोग से की जा रही है।

अरवल्ली जिले में होटल, नाश्ता दुकानों का काम प्रभावित

अरवल्ली जिले में गैस संकट ने होटल और नाश्ता दुकानों के कामकाज को प्रभावित किया है। मोडासा सहित कई स्थानों पर कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति रोक दी है। इसके चलते होटल, रेस्टोरेंट और कैंटीन संचालकों को लकड़ी के चूल्हे और इंडक्शन स्टोव का सहारा लेना पड़ रहा है। गैस की कमी की आशंका से घरेलू सिलेंडरों की एडवांस बुकिंग तीन से चार गुना बढ़ गई है। गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें लग रही हैं और लोग सिलेंडर रिजर्व करने की होड़ में हैं।