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गुजरात में हिन्दी को बढ़ावा देने में मुकादम की अहम भूमिका

अहमदाबाद में 1963 में शुरू हुआ था पहला हिन्दी स्कूल

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Role of Mukadam in promoting Hindi in Gujarat  

गुजरात में हिन्दी को बढ़ावा देने में मुकादम की अहम भूमिका

अहमदाबाद. राज्य में हिन्दी को बढ़ावा देने में शिक्षक नरहर रामकृष्ण मुकादम ने अहम भूमिका निभाई थी। अहमदाबाद में हिन्दी माध्यम का स्कूल सबसे पहले १९६३ में शुरू हुआ था जिसमें उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। इसके बाद हिन्दी स्कूलों में उतरोत्तर वृद्धि होती गई।
मूल महाराष्ट्र के स्वर्गीय नरहर का जन्म १९१९ में हुआ था। इस वर्ष उनकी जनशताब्दी वर्ष मना रहे पुत्र डॉ. प्रशान्त मुकादम ने बताया कि गुजरात में अन्य राज्यों के लोगों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखकर हिन्दी स्कूल शुरू करने का विचार आया था। शहर के शाहपुर क्षेत्र में हिन्दी हाईस्कूल के रूप में सबसे पहले हिन्दी का स्कूल शुरू हुआ था। एल.जी. अस्पताल के प्रोफेसर डॉ. प्रशान्त के अनुसार स्कूल के लिए वर्ष १९५७ में अखिल भारतीय हिन्दी शिक्षण समिति का गठन किया था और उसके छह वर्ष बाद स्कूल शुरू हुआ था। जिसके बाद नरहर ने लगभग १४ वर्ष तक अध्यापक के रूप में सेवा दी। वे स्कूल के प्राचार्य भी रहे थे। गुजरात विश्वविद्यालय से १९५३ में बीएड की पद्वी लेने के बाद वर्ष १९६० में उन्होंने स्नातकोत्तर (एमए) किया था। डॉ. प्रशान्त ने बताया कि अंग्रेजी में अच्छी पकड़ थी लेकिन हिन्दी बहुल्य राज्यों से आने वाले बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखकर हिन्दी स्कूल पर ज्यादा जोर दिया था।