
गुजरात एटीएस की गिरफ्त में आरोपी।
Ahmedabad. गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) की टीम ने पुख्ता सूचना के आधार पर अहमदाबाद के शाहीबाग नमस्ते सर्कल के पास दबिश देकर एक निजी ट्रैवल्स की लक्जरी बस में पार्सलों से प्रतिबंधित सायकोट्रोपिक सबस्टंस ट्रामाडोल की दो लाख 8 हजार टेबलेट जब्त की हैं। इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत आठ करोड़ 32 लाख रुपए है। इस मामले में एक आरोपी को भी पकड़ा है।
गुजरात एटीएस के उपमहानिरीक्षक (डीआइजी) सुनील जोशी ने शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय नशा एवं अवैध तस्करी विरोध दिवस पर संवाददाताओं को बताया कि एटीएस की टीम को पुख्ता सूचना मिली थी कि वलसाड़ के पारडी क्षेत्र में रहने वाला परेश जैन नाम का व्यक्ति काफी समय से अवैध रूप से प्रतिबंधित सायकोट्रोपिक सबस्टंस ट्रामाडोल टेबलेट का व्यापार कर रहा है। इस पर नजर रखी गई। इस बीच पता चला कि इसने 25 जून को न्यू महावीर मेडिकल नाम के टैक्स इनवोइस से अन्य सामान्य दवाओं के नाम दर्शाते हुए अंकलेश्वर से एम.आर.ट्रैवल्स की लक्जरी बस में ट्रामाडोल टेबलेट का जत्था भेजा है। यह जत्था इसने पाली के लिए भेजा है।
एसे में बस को ट्रैक किया गया और जैसे ही यह बस अहमदाबाद के शाहीबाग नमस्ते सर्कल स्थित कार्यालय पहुंची। उसे रोककर उसकी तलाशी ली गई। बस से खाखी रंग के छह बॉक्स मिले, जिसमें अन्य 416 छोटे बॉक्स थे। उनके दोनों साइड पर ट्रामाडोल हायड्रोक्लोराइड आइपी टेबलेट्स 100 एमजी, स्कोविडोल-100 टेबलेट्स लिखा हुआ था। बॉक्स में से कुल 4160 स्टि्रप मिले, जिनमें दो लाख 8 हजार टेबलेट जब्त की गईं। इनकी कीमत 8 करोड़ 32 लाख रुपए है। इसके साथ लक्जरी बस को भी जब्त किया गया है।
प्राथमिक जांच में सामने आया कि लक्जरी बस से पार्सल में प्रतिबंधित दवा भेजने वाला परेश जैन उदयपुर गया है। ऐसे में एक टीम ने उदयपुर रवाना होकर इसे राजस्थान के उदयपुर जिले की गोगुंदा तहसील के सादडी से पकड़ लिया। यह मूलरूप से सादडी का ही रहने वाला है और फिलहाल वलसाड में रहता है। आरोपी का दो जुलाई तक का रिमांड मंजूर हुआ है।दवाओं के स्टॉक का लाइसेंस होने का दावाजोशी ने बताया कि आरोपी की पूछताछ में उसने बताया कि उसके पास दवा के स्टॉक का लाइसेंस है। हालांकि इसके दावे की जांच की जा रही है। यह उत्तराखंड में दवा कंपनियों से दवा खरीदता है और उसे सीमा फार्मा नाम की स्टॉक कंपनी के नाम पर वलसाड में स्टॉक करके रखता है और राजस्थान में बेचता है।
प्राथमिक जांच में सामने आया कि इसने मई 2026 से अबतक उत्तराखंड की दवा कंपनियों से 62.54 लाख टेबलेट को खरीदा है। गुजरात में स्टॉक करके रखा और फिर उसे राजस्थान तथा उत्तरप्रदेश में बेचा है। इसने जब से लाइसेंस लिया तब से ट्रामाडोल टेबलेट ही खरीदीं और बेची हैं।
जोशी ने बताया कि आरोपी परेश जैन का आपराधिक इतिहास है। 2026 में उत्तराखंड के हरिद्वार और महाराष्ट्र के थाणे में कोडिन कफ सिरप के साथ पकड़ा जा चुका है। इसके अलावा गत महीने वापी से एटीएस की ओर से 2.38 किलो मेफेड्रोन के साथ पकड़े गए चार आरोपियों के मामले में भी इसकी लिप्तता सामने आई है। उस मामले में डॉ.जैन के नाम से यह फरार था। इस मामले में भी इसकी गिरफ्तारी की जाएगी।
ट्रामाडोल टेबलेट दर्द निवारक है, लेकिन लत और दुरुपयोग की संभावना के कारण भारत में इसे अप्रेल 2018 से एनडीपीएस के तहत नियंत्रित किया है। कड़े लाइसेंस और प्रिस्क्रिप्शन से इसे खरीदा जा सकता है। इसे सर्जरी के बाद दर्द, क्रॉनिक दर्द, और अन्य गंभीर दर्द स्थितियों में दिया जाता है। कुछ लोग इसका नशे के लिए उपयोग करते हैं।
Published on:
26 Jun 2026 09:54 pm
बड़ी खबरें
View Allअहमदाबाद
गुजरात
ट्रेंडिंग
