
निभाई गई मामेरा की रस्म
भगवान जगन्नाथ की 148वीं रथयात्रा के ननिहाल सरसपुर में पहुंचते ही लोगों ने भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलराम के रथों का गर्मजोशी से स्वागत किया। जय जगन्नाथ का नाद गूंजा। महिलाओं ने लोक गीत गाए।शहर के वासणा निवासी जागृति त्रिवेदी एवं उनके परिवार ने भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और बलराम को भात पहनाया। परंपरागत रूप से यजमान के रूप में इस परिवार ने मामेरा की रस्म निभाई। पिछले आठ वर्ष से यजमान बनने का इंतजार करने वाले त्रिवेदी परिवार ने शुक्रवार दोपहर को जब मामेरा की रस्म निभाई तो उनका चेहरा खिल उठा। अलग-अलग तीनों ही रथों पर उन्होंने भात के रूप में आभूषण और वस्त्र भेंट किए। इन्हेें रजवाड़ी थीम पर तैयार कराया गया था। इससे पूर्व सुबह से ही महिलाओं ने सरसपुर स्थित भगवान रणछोड़ राय मंदिर से लेकर रथों के आगमन स्थल तक पानी से रास्ते को साफ किया। कहा जाता है कि मार्ग को ठंडा करने की यह रस्म होती है। मामेरा के दौरान लोगों के हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैयालाल की नाद से पूरा इलाका गूंज गया।
रथयात्रा के दर्शन के लिए सरसपुर में शुक्रवार सुबह से ही लोग आने लगे थे। रथों के आने तक यह भीड़ डटी रही। भारी भीड़ के दौरान उमसभरी गर्मी भी इन्हें डिगा नहीं पाई। अधिकांश दर्शन के बाद ही लोग वहां से रवाना हुए। रथयात्रा के दौरान बीच-बीच में कई बार बारिश की बूंदों ने गर्मी से राहत भी दी।
भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलराम का रथ सरसपुर पहुंचने पर श्रद्धालुओं में दर्शन की आतुरता नजर आई। श्रद्धालुओं के मंदिर मां कोण छे....राजा रणछोड़ छे.. और जय रणछोड़ माखन चोर.. के नारों से पूरा ननिहाल गूंज उठा। तीनों रथों को सरसपुर चार रास्ता पर एक कतार में खड़ा किया गया, जहां श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध तरीके से भगवान के दर्शन किए।पुलिकर्मी बने सहारा...
सरसपुर में उमड़ने वाली भक्तों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुसिंग स्कवॉड को लगाया था, जिसने बैरीकेड लगाकर भीड नियंत्रित करने का काम किया। जब हाथी दल को रवाना किया जा रहा था, उस समय कई बार धक्का-मुक्की हुई। ऐसे कई महिलाएं, युवतियां और बच्चों की उमस और भीड़ के चलते तबीयत भी बिगड़ी। पुलिसकर्मियों ने उनको पानी पिलाया। सिर पर पानी डाला भीड़ से निकालने में मदद की।
Published on:
27 Jun 2025 09:54 pm

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