
अहमदाबाद के आईकेडीआरसी की अनूठी उपलब्धि : एक ही दिन में दो महिलाओं के गर्भाशय का ट्रान्सप्लान्ट
अहमदाबाद. शहर के इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजिस एंड रिसर्च सेंटर (Institute of Kidney Diseases and Research Center) में एक ही दिन में रविवार को ऐसी दो महिलाओं के uterus गर्भाशय का Transplant ट्रान्सप्लान्ट किया गया जो खामी के चलते माता नहीं बन पा रही थीं। देश और गुजरात में किसी सरकारी अस्पताल में पहली बार ये प्रत्यारोपण किए गए हैं। इन दोनों महिलाओं का गर्भाशय का ट्रान्सप्लान्ट निशुल्क किया गया है। संभवत: अब ये दोनों महिलाएं मां बनने में समर्थ हैं।
गुजरात सरकार ने पिछले दिनों शहर के सिविल अस्पताल कैंपस में स्थित इंस्टीट्यूट आफ किडनी डिजिस एंड रिसर्च सेंटर (IKDRC) को गर्भाशय ट्रान्सप्लान्ट के लिए मंजूरी दी थी। इसके बाद रविवार को दो महिलाओं का ट्रान्सप्लान्ट कर दिया गया है। अब तक पुणे के निजी एक दो निजी अस्पतालों में ही यह सुविधा थी। पहली बार देश में रविवार को किसी सरकारी अस्पताल में गर्भाशय का सफल ट्रान्सप्लान्ट किया गया है। चिकित्सकों का कहना है कि दोनों ही ट्रान्सप्लान्ट सफलता पूर्वक हुए हैं। सुबह आठ बजे से ट्रान्सप्लान्ट शुरू हुआ था जो शाम तक संपन्न हुए। ये प्रत्यारोपण आईकेडीआरसी और पुणे स्थित निजी अस्पताल के चिकित्सकों की टीम ने किए। दोनों ही महिलाओं को गर्भशाय उनकी माताओं की ओर से मिले।
इन महिलाओं के गर्भाशय के ट्रान्सप्लान्ट
28 वर्षीय विवाहित महिला जिसके गर्भाशय में जन्म से ही खामी थी। माता नहीं बन पाने के कारण उन्हें गर्भाशय का ट्रान्सप्लान्ट करवाना पड़ा। उन्हें उनकी माता ने गर्भाशय का दान किया। दूसरी 22 वर्षीय महिला है जिसका जन्म से ही गर्भाशय नहीं था। इस महिला को भी माता की ओर से गर्भाशय का दान किया गया।
दोनों महिलाओं का निशुल्क हुआ गर्भाशय का ट्रान्सप्लान्ट
आईकेडीआरसी में इन महिलाओं का गर्भाशय का ट्रान्सप्लान्ट निशुल्क हुआ है। सरकार की प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई) के तहत प्रति ट्रान्सप्लान्ट के 3.80 लाख रुपए सरकार की ओर से वहन किए गए।
आईकेडीआरसी में यह अनूठी उपलब्धि
आईकेडीआरसी अब तक किडनी, लिवर, पेंक्रियाज के ट्रान्सप्लान्ट के लिए जाना जाता था। अब यहां गर्भाशय के भी ट्रान्सप्लान्ट होने लगे हैं, जो अनूठी उपलब्धि है। इंस्टीट्यूट में पहले से ही मल्टीपल ऑर्गन ट्रान्सप्लान्ट होने के कारण यहां उपकरण, साधन उपलब्ध हैं। पुणे के चिकित्सकों की टीम के सहयोग से रविवार को दोनों ही ट्रान्सप्लान्ट सफल हु हैं। आमतौर पर पांच हजार महिलाओं में से एक को जन्म से ही गर्भाशय की खामी या गर्भाशय नहीं होने का औसत है। इस तरह की महिलाओं को अब माता बनने का सुख मिल सकेगा।
डॉ. विनीत मिश्रा, निदेशक आईकेडीआरसी
Published on:
25 Sept 2022 09:30 pm
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