Ahmedabad.गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस गांधीनगर टीम ने बुजुर्ग लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर करोड़ों रुपए ठगने वाले एक और गिरोह का पर्दाफाश किया है। आरोपियों ने खुद को टेलीकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) और मुंबई क्राइम ब्रांच का आइपीएस अधिकारी बताकर डरा धमकाकर वडोदरा के एक बुजुर्ग के पास से 2.27 करोड़ रुपए ठग लिए थे। आरोपियों ने बुजुर्ग को करीब 14 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा था। इस मामले में चार आरोपियों को पकड़ा गया। पश्चिम बंगाल, हरियाणा और बिहार में दबिश दी गई थी।
साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विवेक भेड़ा ने मंगलवार को संवाददाताओं को बताया कि पकड़े गए आरोपियों में पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले के कर्नामाधबपुर थाना क्षेत्र के माजी परा अर्नामाधबपुर के भूपेंद्रनाथ सरकार (42) शामिल है जिसे कोलकाता से पकड़ा है। इस मामले में यह मुख्य एजेंट है। साथ ही हरियाणा के अंबाला सिटी में न्यू ग्रेइन मार्केट निवासी शुभम सिंगला (32) और बिहार जिले के कैमूर जिले के सरीयाऊ निवासी संजय सिंह (34) व सोनू कुमार (28) को भी गिरफ्तार किया।मनी लॉन्डरिंग केस में लिप्तता के नाम पर डराया
एसपी भेड़ा ने बताया कि आरोपियों ने व्हाट्सएप और सिग्नल एप्लीकेशन से वीडियो कॉल कर पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने का डर दिखाया। वीडियो कॉल चालू रखवाते हुए 14 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा और अलग-अलग बैंक खातों में 2 करोड़ 27 लाख 40 हजार रुपए ट्रांसफर करवा लिए।
बैंक ट्रांजेक्शन के आधार पर लगा सुरागपुलिस ने बताया कि ठगी के मामले में बैंक ट्रांजेक्शन का अध्ययन करने पर पता चला कि 91 लाख रुपए के पैसे बिहार से निकाले गए थे। 1.38 करोड़ रुपए हरियाणा के अंबाला से ट्रेस हुए वहीं ट्रांजेक्शन के आइपी एड्रस कोलकाता में ट्रेस हुए। ऐसे में तीन टीमें बनाकर इन राज्यों भेजी गईं। बिहार से दो, हरियाणा और पश्चिम बंगाल से एक-एक आरोपी को पकड़ लिया।