
facility in law college
रक्तिम तिवारी/अजमेर.
कानून की पढ़ाई कराने वाला लॉ कॉलेज बहुत बदकिस्मत है। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की तरह विद्यार्थी कंप्यूटर चलाते हैं ना किसी मैदान में खेलते दिखते हैं। यूजीसी और राज्य सरकार बजट के नाम पर धेला भी नहीं दे रही है।
वर्ष 2005-06 में अजमेर, भीलवाड़ा, सीकर, नागौर, सिरोही, बूंदी, पाली, कोटा, झालावाड़ और अन्य जगह लॉ कॉलेज स्थापित हुए थे। बार कौंसिल ऑफ इंडिया से इन्हें स्थाई मान्यता नहीं मिली है।
बिल्डिंग बनाकर भूले कॉलेज को
राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान में विकास और यूजीसी के प्रोजेक्ट से लॉ कॉलेज महरूम हैं। राज्य सरकार भी बजट नहीं देती है। सात साल पहले सरकार ने कॉलेज बिल्डिंग बनवाई थी। कायड़ रोड पर बनी बिल्डिंग की चारदीवारी नहीं बनी है। यह चारों तरफ से खुला है। थडिय़ों पर बैठने वाले और झुग्गी-झौंपडिय़ों में रहने वाले लोगों के लिए यह पैदल जाने का शॉर्ट कट है।
कभी नहीं जुटाई ये सुविधाएं...
-एलएलबी और एलएल कोर्स के स्मार्ट क्लासरूम
-हाईटेक सुविधाओं युक्त स्मार्ट मूट कोर्ट
-नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की तरह कंप्यूटर लेब
-इंडोर और आउटडोर खेल सुविधाएं और उपकरण
-कैफेटेरिया, विजिटर्स और रीडिंग रूम
यूजीसी नहीं जानती कॉलेज को
लॉ कॉलेज को यूजीसी जानती भी नहीं है। बार कौंसिल ऑफ इंडिया से स्थाई मान्यता नहीं मिलने के कारण कॉलेज यूजीससी की 12 (बी) और 2 एफ नियम में पंजीकृत नहीं है। पंजीकरण होने पर ही कॉलेज को यूजीसी के शैक्षिक, रिसर्च प्रोजेक्ट और रूसा में संसाधनों के विकास का बजट मिल सकता है।
जब जनाब भये कोतवाल तो, किस बात का है डर...
नहीं हो सकी अतिक्रमियों के खिलाफ कार्रवाई।
अजमेर. पहाड़ों को काटकर अवैध घरौंदे बनाने वाले अतिक्रमियों के खिलाफ वन विभाग कुछ नहीं कर पाया। बीते अगस्त में कई इलाकों में अतिक्रमियों को नोटिस दिए लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा। अतिक्रमियों का अरावली पर कब्जा जारी है। सरकार, जिला प्रशासन और वन विभाग को कोई परवाह नहीं है।
Published on:
13 Oct 2020 07:47 pm
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