अजमेर

14 आरोपितों के खिलाफ मिली अभियोजन स्वीकृति, पांच का एसीबी को इंतजार

डेगाना का पोषाहार घोटाला-2018  

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Jan 10, 2023
14 आरोपितों के खिलाफ मिली अभियोजन स्वीकृति, पांच का एसीबी को इंतजार

अजमेर. नागौर जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग की डेगाना, रियांबडी, परबतसर, मकराना, कुचामन सिटी परियोजना में बच्चों के पोषाहार के चार वर्ष पुराने घोटाला प्रकरण में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को 14 लोक सेवकों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति मिल गई है। प्रकरण में एसीबी को अब बाकी 5 लोकसेवकों की अभियोजन स्वीकृति का इंतजार है। एसीबी अजमेर विशेष अदालत में 19 लोकसेवक एवं 2 अन्य आरोपितों के विरूद्ध चालान पेश करने की तैयारी में है।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को निदेशक समेकित बाल विकास सेवा राजस्थान जयपुर ने 8 महिला पर्यवेक्षक, 2 सहायक प्रशासनिक अधिकारी व चार कनिष्ठ सहायक के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति दी है। इसमें महिला पर्यवेक्षक हेेमा अग्रवाल, गीता वर्मा, मनीषा शेखावत, ज्याना देवी, संताेेषदेवी, संताेेष चौधरी, राजबाला, मूली देवी, सहायक प्रशासनिक अधिकारी आनन्द दायमा, राजेन्द्र त्रिपाठी, कनिष्ठ सहायक खूबचंद भाकर, दिलीप कुमार, विजेन्द्र सिंह व कमल किशाेेर शर्मा शामिल है। एसीबी शेष पांच लोक सेवकों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति मिलने पर कोर्ट में आरोप पत्र पेश करेगी।

यह है मामला

एसीबी अजमेर चौकी ने साल 2018 में नागौर जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग की डेगाना, रियांबड़ी, परबसर, मकराना और कुचामन सिटी परियोजना में बच्चों के पोषाहार में करोड़ों रुपए का घोटाला पकड़ा था। मामले में आरोप है कि बाल विकास परियाेजना उपनिदेशक ऊषा चौधरी, परियोजना अधिकारी डेगाना सुधा यादव, कुचामनसिटी के परियोजना अधिकारी शक्तिसिंह, परबतसर परियोजना के लिपिक खूबचन्द भाकर और डेगाना के परियोजना अधिकारी मंजूर अली ने पद व कर्तव्य की अवहेलना करते हुए दलाल/ठेकेदार हरिसिंह, किशाेर बेंदा व योगेेश दायमा के साथ अन्य लोकसेवकाें/व्यक्तियों के साथ षडयंत्र रचकर फर्जी दस्तावेज व बिल तैयार कर भुगतान उठा लिया।

फर्जी बिल से उठाया था भुगतान

एसीबी की पड़ताल में आया कि आरोपितों ने संगठित अपराध के रूप में महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना डेगाना, रियांबडी, परबतसर, मकराना, कुचामन सिटी के पोषाहार का आधा-अधूरा वितरण करते हुए फर्जी तरीके से लाभान्वितों के हस्ताक्षर/अंगूठा निशानी व अन्य रिकॉर्ड बनाकर फर्जी दस्तावेज बनाकर बिल उठाने का मामला पकड़ा था। एसीबी ने आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में प्रकरण दर्ज किया।

चार जने हुए थे गिरफ्तार

एसीबी ने 31 जुलाई 2018 को मामले में ठेकेदार फर्म के दस्तावेज जांचने के बाद उपनिदेशक ऊषा चौधरी, ठेकेदार हरि सिंह, किशोर बैंदा व योगेश दायमा को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया। प्रकरण में अनुसंधान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सी.पी. शर्मा ने कर 26 अक्टूबर 2018 को एसीबी कोर्ट में चालान पेश किया जबकि शेष आरोपितों के खिलाफ धारा 173(8) सीआरपीसी में अनुसंधान व चालान लम्बित रखा। बाकि अनुसंधान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सतनामसिंह ने किया। अब मुख्यालय 19 लोकसेवक व 2 अन्य आरोपितों के विरूद्ध चालान पेश करेगी।

Published on:
10 Jan 2023 02:01 am
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