साइबर क्राइम : ऐप के जरिए नगर निगम आयुक्त के नंबर से जिला कलक्टर सहित कई अफसरों को किए थे कॉल अजमेर. नगर निगम आयुक्त की ओर से उनके अधीनस्थ अफसरों सहित जिला कलक्टर तक को निगम आयुक्त सुशील कुमार के मोबाइल नंबर से वर्चुअल कॉल करने वाला कोई और नहीं बल्कि पूर्व पार्षद अशोक मलिक व उसका पुत्र द्रुपद मलिक निकला। सदर कोतवाली थाना पुलिस ने तीन माह पुराने इस मामले में दोनों पिता-पुत्र को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया।
कोतवाली में दर्ज है रिपोर्ट
अनुसंधान अधिकारी सिविल लाइन थाना प्रभारी सुरेन्द्र कुमार ने बताया कि सदर कोतवाली थाने में दर्ज प्रकरण में कालू की ढाणी निवासी पूर्व पार्षद अशोक मलिक व उसके पुत्र द्रुपद को गिरफ्तार किया। नगर निगम आयुक्त सुशील कुमार ने 16 अगस्त को कोतवाली थाने में आईटी एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज करवाया था।
बेटे की थी करतूत
थानाधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि पुलिस की साइबर सैल की पड़ताल में द्रुपद के कंप्यूटर आदि का अच्छा जानकार होना पता चला। उसने 20-21 जून को फर्जी एप डाउनलोड कर ऐप के जरिए आयुक्त सुशील कुमार के मोबाइल नंबर से उनके मातहत व अन्य उच्चाधिकारी को कॉल कर परेशान किया। निगम आयुक्त के नाम से आए क़ॉल से जिला कलक्टर भी परेशान रहीं। मामले में जांच करने पर आयुक्त की ओर से कॉल नहीं करना सामने आया। इस पर आयुक्त सुशील कुमार ने कोतवाली थाने में मामला दर्ज करवाया।
रौब जमाने की थी मंशा
पुलिस की प्रारंभिक पड़ताल में आया कि अशोक मलिक प्रशासनिक अधिकारियों पर रौब जमाने और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में पुत्र को नौकरी दिलाने की मंशा से आयुक्त सुशील कुमार व जिला कलक्टर को परेशान कर रहा था।
मोबाइल व लेपटॉप जब्त- पुलिस ने अशोक व द्रुपद के मोबाइल व उनका लेपटॉप जब्त किया है। इनसे भी पुलिस को कई राज खुलने की उम्मीद है। पुलिस कार्रवाई में साइबर सेल के सहायक उपनिरीक्षक रणवीरसिंह, सिविल लाइन के एएसआई रूपाराम, सिपाही विजयसिंह, सौदान, चन्द्रकाश, रामावतार, कमलेश शामिल है।
यह है मामला
निगम आयुक्त ने 16 अगस्त को कोतवाली थाने में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ आईपीसी की धारा 170, 186, 416, 419, 468, 469 व आईटी एक्ट 66(सी), 66(डी) में मामला दर्ज कराया था। उन्होंने रिपोर्ट में बताया कि उनका मोबाइल फोन हैक कर उनके नम्बर से 21 जून को देर रात करीब साढ़े 12 से 2 बजे और सुबह साढ़े 7 से 9 बजे व दोपहर साढ़े 12 से दोपहर 2 बजे तक अलग-अलग समय पर जिला कलक्टर भारती दीक्षित समेत नगर निगम के अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता व सहायक अभियंता, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अधिकारियों को कॉल हुए, जबकि उनके मोबाइल की सीडीआर में कॉल दिखाई नहीं दे रही थी। उन्होंने किसी भी व्यक्ति को कॉल नहीं किया था।
इनका कहना है...
किसी आपराधिक तत्व द्वारा नगर निगम कमिश्नर का प्रतिरूपण कर नगर निगम के विभिन्न अधिकारियों, जिला कलक्टर व बाहरी व्यक्तियों को कॉल किया। कॉल कर नगर निगम और अधिकारी की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया। कोतवाली थाने में मामला दर्ज करवाया था। पूर्व पार्षद अशोक मलिक व उसके पुत्र का सच सामने आ गया।
- सुशील कुमार, आयुक्त, नगर निगम