13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ये है देश का सबसे पुराना रेलवे हॉस्पिटल, अब यूं होगा यहां मरीजों का इलाज

रेलवे अस्पताल अजमेर को बेहतर प्रबंधन के लिए 40 हजार रुपए के पुरस्कार की भी घोषणा की।

2 min read
Google source verification

अजमेर

image

dilip sharma

Dec 10, 2017

railway hospital ajmer

railway hospital ajmer

दिलीप शर्मा/अजमेर।

रेलवे अस्पताल की ओपीडी में अब कम्प्यूटर से पर्चियां बनेंगी। मरीजों का पंजीयन व अन्य विवरण इसमें अंकित होंगे। इससे मरीजों को भी लाइन से निजात मिलने की उम्मीद है वहीं उनका वक्त भी जाया नहीं होगा।
रेलवे बोर्ड के महानिदेशक (स्वास्थ्य) अनिल कुमार, मुख्य चिकित्सा निदेशक ए.के. सैंगर व मंडल रेल प्रबंधक पुनीत चावला ने अस्पताल में चिकित्सा सेवाओं के कम्प्यूटरीकरण का उद्घाटन किया। टोकन आधारित क्यू मैनेजमेंट सिस्टम व कम्प्यूटरीकृत ओपीडी पंजीयन प्रणाली की शुरुआत की। अस्पताल के शताब्दी हॉल में ऑल इंडिया रेलवे रेडियोग्राफर कांफ्रेंस का आयोजन किया गया।

इसे संबोधित करते हुए महानिदेशक स्वास्थ्य अनिल कुमार ने कहा कि रेडियोग्राफ र की जांच के दौरान सफ ाई का विशेष ध्यान रखें व मरीजों से उत्तम व्यवहार किया जाए। उन्होंने रेलवे अस्पताल अजमेर को बेहतर प्रबंधन के लिए 40 हजार रुपए के पुरस्कार की भी घोषणा की।

सोनोग्राफी मशीन लगेगी
मंडल रेल प्रबंधक पुनीत चावला ने संयोग की बात है कि अजमेर रेलवे अस्पताल की स्थापना व एक्स-रे की खोज 1895 में हुई। उन्होंने अजमेर रेलवे अस्पताल में सोनोग्राफ ी मशीन व रेडियोलॉजिस्ट की जरुरत बताई। महानिदेशक स्वास्थ्य ने जयपुर से सप्ताह में 3 दिन डॉक्टर रेडियोलॉजिस्ट अजमेर में ड्यूटी करने के आदेश दिए और सोनोग्राफ ी मशीन खरीदी जाने की स्वीकृति दी। उन्होंने बताया कि हॉस्पिटल में 46 लाख की लागत से नया ओपीडी द्वार बनाया जाएगा।

कतार प्रबंधन प्रणाली क्यू मैनेजमेंट सिस्टम एक एप्लीकेशन है जो अजमेर डिवीजन से शुरू किया गया है ताकि सॉफ्टवेयर के माध्यम से रोगियों को इलेक्ट्रॉनिक टोकन आवंटित किए जाएंगे। टीवी स्क्रीन पर मरीज का टोकन नम्बर प्रदर्शित होगा उस अनुसार मरीज अपना परामर्श ले सकेगा। वृद्ध मरीजों को अब कतार में खड़े रहने की जरुरत नहीं रह जाएगी।

कम्प्यूटरीकृत ओपीडी प्रबंधन प्रणाली
इस सिस्टम में रेलवे मेडिकल ओपीडी प्रणाली का प्रबंधन किया गया है जिसमें वास्तविक समय में मरीज के विवरणों को अपडेट करने के लिए कम्प्यूटरीकृत सिस्टम से रेलवे कर्मचारी और उनके वार्ड के विवरण का आसानी से प्रबंधन किया जा सकेगा। कम्प्यूर फीडिंग के बाद मरीज दोबारा जांच कराने के लिए आता है तो उसे अपना पीएफ नम्बर बताना होगा जिससे उसके पहले किए गए इलाज की पृष्ठभूमि की जानकारी स्लिप के साथ मिल सकेगी।

यह होंगी सहूलियतें
- अस्पताल के समस्त रिकॉर्ड आदि भी सुरक्षित मिल सकेंगे। - डाटा फीडिंग व स्कैनिंग के फलस्वरूप कुशल बिलिंग, वितरित की गई दवाएं आदि की जानकारी मिल सकेगी।
- कागजी कार्रवाई खत्म होगी,डाटा फिडिंग व स्कैनिंग के फलस्वरूप संवेदनशील फाइलें गोपनीय रखी जा सकेंगी।

- पेपरलैस वर्क होने से पर्यावरण में सहयोग व फाइलों का सुरक्षित रखा जा सकेगा।
- समय की बचत व दस्तावेज की स्कैनिंंग के बाद यह सुरक्षित रखे जा सकेंगे जिनमें दावे व बीमा आदि के कार्य सरल होंगे।
- दावों के लिए रोगी को वांछित दस्तावेज उपलब्ध हो सकेंगे।