अजमेर/चूरू. सत्तारूढ़ सरकार तो केवल योजनाएं बनाकर दे सकती है। उसे लागू करना तो नौकरशाह का काम है। जनहित से जुड़ी किसी योजना का सफल क्रियान्वयन तभी हो सकता है,जब सम्बन्धित महकमा गंभीर हों। संस्थागत प्रसव को लेकर राज्य सरकार ने सहायता राशि का प्रावधान किया है,ताकि सुरक्षित प्रसव हो सके। जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रहे। यही वजह है कि आजकल गांवों में देसी तरीके से प्रसव नगण्य होने लगे हैं। दूसरी ओर चूरू जिले का स्वास्थ्य महकम संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देता नहीं दिख रहा। तभी तो बीते पांच माह से प्रसूताओं की सहायता राशि अटकी हुई है।