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Big issue: विवि और सरकार पर नजरें, होंगी या नहीं तृतीय वर्ष की परीक्षा

राज्य सरकार स्थगित कर चुकी हैं परीक्षाएं। सरकार और विश्वविद्यालयों को नए सिरे से विचार करना होगा।
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eyes on exam

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अजमेर.

कॉलेज-विश्वविद्यालयों में तृतीय वर्ष की परीक्षाओं पर असमंजस कायम है। सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के फैसले को सही ठहराते हुए 30 सितंबर तक परीक्षाएं कराने को कहा है। बीती जुलाई में सभी परीक्षाएं स्थगित कर चुकी राज्य सरकार और विश्वविद्यालयों को नए सिरे से विचार करना होगा।

लॉकडाउन और कोरोना संक्रमण के चलते राज्य के सभी विश्वविद्यालयों ने बीते मार्च-अप्रेल में सैद्धांतिक और प्रायोगिक परीक्षाएं स्थगित की थीं। इनमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष सहित पीजी स्तर के 50 लाख से ज्यादा विद्यार्थी शामिल हैं। बीती जुलाई में राज्य सरकार ने परीक्षाएं लेने के बजाय सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों को प्रमोट करने का ऐलान किया।

परीक्षाएं कराएं या नहीं...
यूजीसी ने देश के सभी विश्वविद्यालयों-कॉलेज को 30 सितंबर तक तृतीय वर्ष की परीक्षाएं कराने के आदेश दिए हैं। इसको लेकर असमंजस कायम है। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर ने एकेडेमिक कौंसिल की बैठक में सभी विद्यार्थियों को प्रमोट करने का ऐलान किया है। जबकि अजमेर, बीकानेर, भरतपुर, सीकर, जयपुर, बीकानेर सहित अन्य विश्वविद्यालयों ने कोई निर्णय नहीं किया है। हालांकि विश्वविद्यालयों ने डीन कमेटी अथवा एकेडेमिक कौंसिल की बैठक में मुद्दा रखा है।


तृतीय वर्ष की परीक्षाएं कराने अथवा नहीं कराने को लेकर स्थिति साफ होनी चाहिए। हजारों विद्यार्थी परेशान हैं। एक तरफ उन्हें ऑनलाइन पढ़ाई तो दूसरी तरफ परीक्षाओं की तैयारी करनी पड़ रही है।
आशूराम डूकिया, महानगर मंत्री अभाविप

कोरोना संक्रमण के बावजूद यूजीसी तृतीय वर्ष की परीक्षा कराना चाहती है। राज्य सरकार जुलाई में ही विद्यार्थियों को प्रमोट करने की घोषणा कर चुकी है। यूजीसी को प्रमोट करने में क्या दिक्कत है, इसका खुलासा करना चाहिए।
नवीन सोनी, एनएसयूआई जिलाध्यक्ष

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