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Bust up India: 1604 करोड़ रुपए चपत, उद्योगों को चाहिए रफ्तार

कुशल श्रमिकों के लौटने से उत्पादन प्रभावित। पूर्ण क्षमता से नहीं चल रहे उद्यम।

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industrial loss ajmer

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रक्तिम तिवारी/अजमेर.

कोरोना वायरस संक्रमण और लॉकडाउन से जिले की अर्थव्यवस्था जबरदस्त असर पड़ा है। प्रवासी श्रमिकों-कुशल कामगारों के अपने शहरों-गांवों में लौटने से औद्योगिक उत्पादन प्रभावित है। जिले में औद्योगिक इकाइयां पूर्ण क्षमता से नहीं चल रहीं। आयात-निर्यात ठप है। उद्यमियों को तीन से छह महीने बाद ही गाड़ी पटरी पर आने की उम्मीद है।

अजमेर इंजीनियरिंग मशीन-टूल्स, मार्बल, सीमेंट, ऊन, वस्त्र, पावरलूम, रेडीमेड गार्मेन्ट और अन्य उद्यमों का केंद्र है। शहरों-गांवों में स्थानीय स्तर के लघु, मझौले और स्थानीय स्तर के रोजगार हैं।

जिले के प्रमुख रोजगार-नुकसान (दो महीने में)
गुलकंद व्यवसाय पुष्कर: सालाना टर्न ओवर-100 करोड़, नुकसान-160 लाख रुपए
मशीन टूल्स-सालाना टर्न ओवर: 125 करोड़, नुकसान-180 लाख रुपए
इंजीनियरिंग उद्योग: सालाना टर्न ओवर-100 करोड़, नुकसान-180 लाख रुपए
ब्यावर मिनरल, फेल्सपार, क्वार्टज उद्योग: सालाना टर्न ओवर-45 अरब रुपए, नुकसान-300 करोड़ रुपए
पावरलूम उद्योग किशनगढ़-सालाना टर्न ओवर-500 करोड़ रुपए (4 लाख मीटर कपड़ा प्रतिदिन), नुकसान-2.5 करोड़ प्रतिदिन (2 हजार मीटर कपड़ा प्रतिदिन)
मार्बल और ग्रेनाइट उद्योग किशगढ़-सालाना टर्न ओवर-44 अरब रुपए, नुकसान-600 करोड़
नसीराबाद ट्रेलर उद्योग: सालाना टर्न ओवर-100 से 150 करोड़ (79 दुकानें), नुकसान-160 लाख (कोराबार ठप)
अजमेर बीड़ी उद्योग: सालाना टर्न ओवर-1 अरब 44 करोड़, नुकसान-24 करोड़ रुपए

यह दिए उद्यमियों ने सुझाव
किसानो को नुकसान की भरपाई रियायती दर पर ऋण मिले। नुकसान की भरपाई रियायती दर पर ऋण और लघु उद्योग बढ़ावा की ठोस योजना बने। गुलाब खेती को प्रोत्साहन, खेती के लिए 24 घंटे बिजली मिले। मौसमी नुकसान की भरपाई की सरकारी स्तर पर व्यवस्था और गुलकंद विक्रय के नए केंद्र स्थापित हो।
हनुमान सिंगोदिया,फूल व्यवसाय संघ अध्यक्ष

अजमेर से देश के विभिन्न शहरों सहित खाड़ी देशों, मिस्र, टर्की, इटली और अन्य देशों में कटर निर्यात होते हैं। प्रतिमाह 90 लाख से ज्यादा नुकसान हो रहा है। बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों के 70 प्रतिशत प्रवासी श्रमिक लौट चुके हैं। श्रमिकों के लौटने और पूर्ण औद्योगिक उत्पादन शुरू हो सकता है।

गुरविंदरसिंह, मार्बल-ग्रेनाइट कटर निर्माता

औद्योगिक और अन्य इकाइयों में कार्यरत 55 से 65 प्रतिशत श्रमिक-कार्मिक पलायन कर चुके हैं।औद्योगिक इकाइयां चल चुकी हैं। इनमें 25 से 30 प्रतिशत ही प्रोडक्शन ही हो रहा है। इंजीनियरिंग इकाइयों को विदेश से ऑर्डर मिले हैं, लेकिन कुशल श्रमिकों की वापसी जरूरी है।

राधेश्याम चोयल, निदेशक, चोयल इंडस्ट्री
वैश्विक महामारी में विद्युत के स्थायी शुल्क में छूट दी जानी चाहिए। अब तक सरकार की ओर से छूट नहीं दी गई है। उद्योग पर लिए लोन की किश्त जमा करवाने में छह माह की छूट मिले। छह माह बाद किश्तें ली जाए तो व्यापार वापस गति पकड़ लेगा।

आशीष पदावत, ब्यावर
सरकार लॉकडाउन अवधि का बिजली का फिक्स चार्ज समाप्त करने के अलावा पेनल्टी हटाए। ब्याज में कमी कर अनुदान बढ़ाने की जरूरत है।जगदीश नारायण बंसल, पावरलूम उद्यमी दो माह से उद्योग बंद होने के कारण 10 हजार मजदूर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष बेरोजगार हो गए हैं। प्रवासी श्रमिकों की वापसी जरूरी है।

मोहनलाल यादव, किशनगढ़ पावरलूम श्रमिक यूनियन अध्यक्ष

माल की खरीद ओर बिक्री की दरो में काफी अन्तर होने के कारण टेक्सटाइल ओर जिनिंग पे्रसिंग उद्योग को जबरदस्त नुकसान है। टेक्सटाइल ओर जिनिंग पे्रसिंग जैसे लघु उद्योगों के हितों को मद्देनजर सरकार और निगम को रूई की बिक्री की दरें निर्धारित करनी चाहिए। टेक्सटाइल और जिनिंग पे्रसिंग जैसे लघु उद्योग अधिक उत्पादन बढ़ाकर व काफी संख्या में रोजगार के अवसर प्रदान करने की जरूरत है।
आलोक जैन ,कंचन उद्योग बिजयनगर