
महाराणा प्रताप के सैनिक आज भी ‘वाण’ और भाले की करते हैं पूजा
चन्द्र प्रकाश जोशी
अजमेर. मेवाड के शिरोमणी महाराणा प्रताप की सेना के सदस्य गाडिया लौहार आज भी अपने स्वामी के वचनों में बंधे हैं। सैनिकों का मुख्य हथियार ‘भाला’ और मुख्य वाहन ‘वाण’ (गाड़ी) की अपनी संतान से भी अधिक देखभाल करते हैं। इनकी हर संध्या पूजा करते हैं। आज भी गाडि़या लौहार परिवार गाड़ी नहीं तो उसके अवशेष को संभाल कर रखते हैं।
मेवाड़ एवं मारवाड़ के बोर्डर के मध्य बसे अजमेर में भी गाडि़या लौहारों के सैकड़ों परिवार बसे हैं। महाराणा प्रताप की जयंती पर तो यह परिवार आयोजन करते ही हैं, मगर अपने स्वामी प्रताप के निभाए कई नियमों की आज भी कई परिवार पालना करते हैं।
हर दूज को ‘वाण’ की विशेष पूजा, संध्या में करते हैं आरती
सुभाषनगर निवासी गाडि़या लौहार भागचंद ने बताया कि हमारे पुरखे हमेशा गाडि़यों में रहते थे। एक जगह लम्बे समय तक नहीं रुकते। लोहे के औजार व सामान बनाने का काम था। समय के साथ सरकार ने गाडि़या लौहार परिवारों को भी शहरों में छोटे मकान व जमीन आवंटित की, लेकिन घरौंदों में गाड़ी रखते हैं और बुजुर्ग तो उसमें ही सोते हैं। भागचंद के अनुसार उसका जन्म भी गाड़ी में हुआ। गाड़ी को वाण कहते हैं, आज भी हर दूज को विशेष पूजा करते हैं, हर संध्या में पूजा करते हैं।
भाले का प्रतीक, गाड़ी में देवरा बनाया
ऊसरी गेट निवासी शिवराज ने बताया कि महाराणा प्रताप का मुख्य शस्त्र भाला था, आज भी हमारे पास उसका प्रतीक है, इसकी हर दिन पूजा करते हैं। यही नहीं गाड़ी के पहिया व अवशेष संभाल कर रखे हैं, पीढ़ी दर पीढ़ी हम इन्हें रख रहे हैं। गाड़ी में ही पाबूजी का देवरा बना रखा है। कान के पीछे गिठाने होने व अन्य बीमारी में यहां अगरबत्ती करने से भी ठीक हो जाते हैं। हम परंपरा को कायम रखे हुए हैं।
हर तीसरे परिवार में बच्चों का नाम प्रताप
गाडि़या लौहार परिवारों में हर तीसरे परिवार में बच्चों का नाम प्रताप रखते हैं। अब नाम के साथ प्रताप भी लगाने लगे हैं। तेजप्रताप, शिव प्रताप, प्रताप, रामप्रताप आदि।
Published on:
22 May 2023 02:48 am
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