रुद्र के मोर्चरी पहुंचने के आधा घंटे बाद उसकी मां को परिजन जेएलएन अस्पताल लेकर पहुंचे। जख्मी मां की आंखें यहां भी अपने लाल को तलाशती रही। चिकित्सकों से वह लगातार पूछती रही कि कहां है मेरा बच्चा, वो ठीक तो है ना, उसकी सांसें तो चल रही है ना? मासूम के लिए मां के सवालों ने उसका इलाज कर रहे चिकित्सकों व नर्सिंग कर्मियों का दिल भी पसीज गया। हालाकि मां को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।