
जिले के'राजÓ में चाणक्य नीति के गढ़े समीकरण!
चन्द्र प्रकाश जोशी
अजमेर. जिला प्रमुख के चुनाव में भाजपा की बागी एवं निर्दलीय प्रत्याशी पूर्व विधायक सुशील कंवर पलाड़ा को कांग्रेस का समर्थन मिलने के बाद अजमेर जिले की 'राजÓ नीति में भी नए समीकरण बनने-बिगडऩे के हालात बन गए हैं। मसूदा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की विधायक रही सुशील कंवर पलाड़ा को उनके ही विधानसभा क्षेत्र के एक कांग्रेसी नेता के साथ कांग्रेस के कई दिग्गजों ने जिला प्रमुख पद पर समर्थन देकर राजनीतिक गलियारों में बहस छेड़ दी है।
जिला प्रमुख चुनाव के बहाने भाजपा के कद्दावर नेता एवं कांग्रेस के इस गठजोड़ को भावी रणनीति के तहत देखना भले ही जल्दबाजी होगी लेकिन इनकी नजदीकियों ने भाजपा खेमे में खलबली मचा दी है। पलाड़ा के बगावत कर निर्दलीय चुनाव लडऩे पर भाजपा आलाकमान ने रिपोर्ट भले ही मांग ली हो लेकिन किसी निर्णय तक पहुंचने में वहां भी जल्दबाजी नहीं किया जाना माना जा रहा है। भाजपा नेताओं के अहम की लड़ाई में फंसे इस पेंच से बाहर निकलना फिलहाल भाजपा के लिए चुनौती बन गई है।
कांग्रेस की ओर से भाजपा को जिला प्रमुख पद से बेदखल करने का मकसद तो पूरा हो गया लेकिन कांग्रेस आलाकमान की मंशा के अनुरूप पलाड़ा को कांग्रेस में शामिल कराने की कोशिश आसान नहीं होगी। हालांकि नवनिर्वाचित जिला प्रमुख सुशील कंवर पलाड़ा के पति व भाजपा नेता भंवर सिंह पलाड़ा ने कांग्रेस में शामिल होने की बात को सिरे से खारिज कर दिया। लेकिन जिला प्रमुख के लिए कांग्रेस की ओर से किए गए सहयोग के लिए धन्यवाद देने में उन्होंने देर नहीं की।
भाजपा की फूट का किस पर कैसा असर
भाजपा: भाजपा बहुमत के बावजूद जिला प्रमुख नहीं बना सकी। भाजपा से जीते 21 सदस्यों में बगावत हो गई। बहुमत मिलने के बावजूद जवाजा, मसूदा एवं किशनगढ़ में भाजपा का प्रधान नहीं बना। इससे भाजपा की खींचतान चौड़े आ गई।
कांग्रेस: कांग्रेस में सचिन पायलट व डॉ. रघु शर्मा ने एक ही दिशा में ताकत लगाई। मसूदा में कांग्रेस का बहुमत नहीं होने पर भी कांग्रेस का प्रधान बना लिया। इससे ग्रामीण क्षेत्र में कांग्रेस को मजबूती मिली। पलाड़ा को भाजपा से दूर करने की रणनीति में भी प्रारंभिक सफलता मिली है।
Published on:
11 Dec 2020 02:25 am
बड़ी खबरें
View Allअजमेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
