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अजमेर की दरगाह को ‘मंदिर’ घोषित कराने का वाद दायर

– पूजा-अर्चना के अधिकार दिलाने व अतिक्रमण हटाने की मांग -अजमेर की अदालत में आज सुनवाई अजमेर. अजमेर की ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह परिसर को ‘भगवान संकट मोचन महादेव विराजमान मंदिर’ घोषित कराने, यहां पूजा-पाठ कराने की अनुमति देने व दरगाह कमेटी के अनाधिकृत कब्जे हटाने की मांग को लेकर स्थानीय अदालत में वाद […]

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अजमेर

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Dilip Sharma

Sep 25, 2024

court news

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- पूजा-अर्चना के अधिकार दिलाने व अतिक्रमण हटाने की मांग

-अजमेर की अदालत में आज सुनवाई

अजमेर. अजमेर की ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह परिसर को ‘भगवान संकट मोचन महादेव विराजमान मंदिर’ घोषित कराने, यहां पूजा-पाठ कराने की अनुमति देने व दरगाह कमेटी के अनाधिकृत कब्जे हटाने की मांग को लेकर स्थानीय अदालत में वाद पेश किया गया है। दरहाह के संपूर्ण भवन के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) से वैज्ञानिक सर्वे कराने की मांग को लेकर अजमेर की एक अदालत में दीवानी दावा पेश किया गया है। मामले में बुधवार को सुनवाई होगी।दरगाह कमेटी, एएसआई प्रतिवादीहिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरिता विहार निवासी विष्णु गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट के वकील शशि रंजन कुमार सिंह के जरिए अजमेर की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में वाद दायर कर कहा कि वादीगण संंकट मोचन महादेव मंदिर विराजमान व इसके संरक्षक मित्र विष्णु गुप्ता हैं। दीवानी प्रक्रिया संहिता की धारा 75 ई के तहत दायर वाद में दरगाह कमेटी व अल्प संख्यक मंत्रालय एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को प्रतिवादी बनाया गया है।-----------------------------------------------------

मंदिर के मलबे से बना है बुलंद दरवाजा. . .वकील शशि रंजन सिंह ने बताया कि घोषणात्मक डिक्री का वाद पेश किया गया है। मौजूदा दरगाह परिसर प्राचीन समय से शिव मंदिर रहा और यहां पूजा-अर्चना व जलाभिषेक किया जाता रहा है। परिसर में एक जैन मंदिर होना भी बताया गया। वाद में अजमेर निवासी हरविलास शारदा की वर्ष 1911 में लिखित पुस्तक हिस्टोरिकल एंड डिस्क्रप्टिव में मंदिर होने के प्रमाणों का उल्लेख किया गया है। किताब में उल्लेखित तथ्यों का हवाला देते हुए बताया कि मौजूदा 75 फीट ऊंचे बुलंद दरवाजे के निर्माण मे मंदिर के मलबे के अंश हैं। एक तहखाना या गर्भगृह है जिसमें शिवलिंग था। जिसमें ब्राह्मण परिवार पूजा-अर्चना करता था। वाद में दरगाह कमेटी द्वारा क्षेत्र में बनाए गए अवैध कब्जे हटाने व मंदिर में पूजा-अर्चना का अधिकार दिलाने की मांग की गई है।

नहीं हैं मस्जिद बनाने के प्रमाणवकील सिंह ने बताया कि शाहजहां के समय की पुस्तकें व अकबरनामा आदि में अजमेर में कोई मस्जिद बनाने आदि के प्रमाण नहीं हैं। ऐसा कोई प्रमाण भी नहीं कि ख्वाजा साहब की दरगाह खाली भूमि पर बनाई गई हो। हाल ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार जिले में एक भोजनशाला के सर्वे के आदेश देने का हवाला भी वकील सिंह ने दिया। प्रकरण बुधवार को सुनवाई के लिए नियत है।अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़े थे शारदा

शारदा तब रॉयल एशियाटिक ब्रिटेन एंड आयरलैंड के सदस्य व रॉयल मेडिकल सोसायटी के सदस्य थे। किताब में अंकित तथ्यों के आधार पर दावे में बताया गया है कि अजमेर मेरवाड़ा एस्टेट के समय से शारदा 1892 से 1925 तक चीफ जज जोधपुर रहे। शारदा अजमेर में एडिशनल एक्स्ट्रा कमिश्नर भी रहे।

अजमेर दरगाह के मामले में इसे भगवान श्री संकटमोचन महादेव विराजमान मंदिर घोषित करने और दरगाह समिति के अनधिकृत अवैध कब्जे को हटाने और एएसआई द्वारा वैज्ञानिक सर्वेक्षण के लिए अजमेर जिला न्यायालय के समक्ष श्री विष्णु गुप्ता, राष्ट्रीय अध्यक्ष हिंदू सेना द्वारा एक नागरिक मुकदमा दायर किया गया है।