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अब नहीं चलेगा शॉर्ट कट फार्मूला, नंबर लेने हैं तो करना पड़ेगा ये काम

इससे थ्योरी के बजाय लघु शोध में ज्यादा से ज्यादा नंबर लेने की विद्यार्थियों की प्रवृत्ति कम होगी।

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अजमेर.

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से सम्बद्ध लॉ कॉलेज के एलएलएम कोर्स में जल्द बदलाव होगा। इसमें डिजर्टेशन (लघु शोध) अब आसानी से नहीं मिलेगा। 55 या इससे अधिक प्रतिशत लाने वाले विद्यार्थियों से आवेदन लिए जाएंगे। साक्षात्कार और अन्य प्रक्रिया के बाद ही डिजर्टेशन का आवंटन किया जाएगा। इससे थ्योरी के बजाय लघु शोध में ज्यादा से ज्यादा नंबर लेने की विद्यार्थियों की प्रवृत्ति कम होगी।

विश्वविद्यालय से सम्बद्ध लॉ कॉलेज में करीब दस साल से एलएलएम कोर्स संचालित हैं। यहां पार्ट प्रथम और पार्ट द्वितीय में 40-40 सीट हैं। मौजूदा समय दोनों पार्ट में पांच-पांच पेपर और प्रेक्टिकल का प्रावधान है। साथ ही डिजर्टेशन (लघु शोध) की अहमियत भी है। मौजूदा प्रक्रिया के तहत विद्यार्थी डिजर्टेशन (लघु शोध) को ज्यादा तवज्जो देते हैं। इंटरनेट या अन्य माध्यमों पर उपलब्ध सामग्री का उपयोग कर फाइल तैयार कर लेते हैं। इससे उन्हें थ्योरी के बजाय लघु शोध में अंक अच्छे मिल जाते हैं। लिहाजा विधि संकाय के विशेषज्ञ डिजर्टेशन आवंटन को मजबूत बनाने के पक्षधर हैं।

यूं होगा डिजर्टेशन आवंटन
लॉ कॉलेज के रीडर डॉ. आर. एन. चौधरी के अनुसार प्रस्तावित योजना के तहत विद्यार्थियों को डिजर्टेशन (लघु शोध) अब आसानी से नहीं मिलेगा। एलएलबी में 55 या इससे अधिक प्रतिशत लाने वाले विद्यार्थियों से डिजर्टेशन के लिए बाकायदा आवेदन लिए जाएंगे। साक्षात्कार और अन्य प्रक्रिया के बाद डिजर्टेशन का आवंटन किया जाएगा। इसके अलावा उन्हें कक्षाओं में भी उपस्थिति देनी होगी।

कोर्स की हालत नहीं ठीक
विधि शिक्षा देने वाले लॉ कॉलेज में एलएलएम पाठ्यक्रम की स्थिति ठीक नहीं है। यहां मात्र छह शिक्षक और वकील कक्षाएं लेते हैं। लॉ कॉलेज में दस साल से स्थाई प्राचार्य की नियुक्ति नहीं हो पाई है। यहां वरिष्ठतम शिक्षक को प्राचार्य पद का चार्ज देना जारी है। यूं तो यहां एलएलएम की कक्षाएं शाम को निर्धारित हैं, लेकिन विद्यार्थी कम आते हैं।

विवि का एलएलएम भी बदहाल
विश्वविद्यालय ने सत्र 2006-07 में एलएलएम पाठ्यक्रम शुरु किया। यहां प्रथम और द्वितीय वर्ष 40-40 सीट है। शुरुआत में पाठ्यक्रम में पर्याप्त प्रवेश नहीं हुए। विधि के बजाय दूसरे विभागों के शिक्षकों को यहां विभागाध्यक्ष बनाना जारी है। पूर्व में राजस्थान विश्वविद्यालय के विधि शिक्षक प्रो. के. एल. शर्मा और लॉ कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. एस.आर. शर्मा यहं नियुक्त थे। इनके जाने के बाद से एलएलएम बदहाल है।

बार कौंसिल भी नहीं गंभीर
कोर्स को लेकर बार कौंसिल ऑफ इंडिया ज्यादा गंभीर नहीं है। उसके नियम पार्ट-चतुर्थ, भाग-16 में साफ कहा गया है, कि विश्वविद्यालय और कॉलेज को एलएलएम कोर्स के लिए स्थाई प्राचार्य, विषयवार शिक्षक और संसाधन जुटाने जरूरी हेांगे। फिर भी बीसीआई की कमेटी ने लॉ कॉलेज और विश्वविद्यालय को चेतावनी देने या पाठ्यक्रम बंद करने की कोशिश नहीं की है।