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बोले देवनानी-दुख होता है खेलों की ऐसी दुर्दशा देखकर

विधानसभा में खेलों और संसाधनों की दुर्दशा पर सवाल उठा।

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games and sports

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अजमेर. अजमेर. उत्तर विधायक वासुदेव देवनानी ने मंगलवार को विधानसभा में खेलों और संसाधनों की दुर्दशा पर सवाल उठा।

देवनानीन ने कहा कि सरकार ने ओलम्पिक मेडल धारकों के लिए ईनाम की घोषणा तो कर दी, पर सुविधाएं के लिए बजट की व्यवस्था नहीं की है। स्कूल, कॉलेज व विश्वविद्यालयों में होने वाली खेल प्रतियोगिताएं औपचारिक होती हैं। सरकार ने 3 करोड़ युवाओं के लिए वर्ष 2019-20 में 15 करोड़ और 2020-21 में 20 करोड़ का बजट रखा है। राज्य में 27 लाख युवा बेरोजगार हैं। इनमें 12.91 लाख रोजगार कार्यालय में पंजीकृत हैं। गिने-चुने बेरोजगारों को ही भत्ता दिया जा रहा है। पिछले महीने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की रैली में जाने के लिए महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों और शिक्षकों पर दबाव बनाया गया। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में योग्यता को ताक में रखकर राजकीय महाविद्यालय में कार्यरत भूगोल की व्याख्याता को खेल बोर्ड अधिकारी बना दिया गया।

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जवाहर स्कूल में इंडोर खेल स्टेडियम का निर्माण कराया गया। यह 1 साल से बंद पड़ा है। अजमेर में डे-बोर्डिंग कबड्डी एकेडमी की स्वीकृति मिली थी। खिलाडिय़ों के चयन हेतु ट्रॉयल भी हुआ पर इसे ठण्डे बस्ते में डाल दिया है। चन्द्रवरदाई नगर में निर्मित सिंथेटिक टेनिस कोर्ट भी खराब हो रहा है।सरकार ने झुंझुनु में 2013 में राजस्थान क्रीडा विश्वविद्यालय खोले जाने की घोषणा की थी। जमीन आवंटन के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ है। तहसील स्तर पर खेल स्टेडियम का निर्माण कराने की घोषणा की थी।

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मौजूदा बजट प्रावधान में दो-तीन स्टेडियम भी नहीं बन पाएंगे। सवा साल में सरकार युवा बोर्ड का गठन नहीं कर पाई है। 2018 में यूथ आईकॉन योजनान्तर्गत आईटीए पर्यावरण सुरक्षा सहित 10 श्रेणियों मेें युवा प्रतिभाओं का चयन किया गया। इन्हें पुरस्कृत नहीं किया गया है। खेल अकादमियों के बुरे हाल हैं। फुटबॉल अकादमी में 30 स्थानों में से 23, बालिका बॉस्केटबाल में 25 में से 7 तथा साईकिलिंग में 30 में से 11 खिलाड़ी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे है।

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राज्य क्रीडा परिषद खिलाडिय़ों को महाराणा प्रताप पुरस्कार तथा खेल प्रशिक्षकों को गुरू वशिष्ठ पुरस्कार देती है। वर्ष 2018-19 के आवेदन अब मांगे जा रहे हैं। स्टेट गेम्स कराने वाले तकनीकी अधिकारियों को पारिश्रमिक भुगतान नहीं मिला है। सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के साथ ही शारीरिक शिक्षकों के पद रिक्त है। बालिकाओं को विद्यालय तक आने के लिए ट्रांसपोर्ट वाउचर तथा सेनेटरी नेपकिन नहीं मिल रहे हैं।