
मछली
हिमांशु धवल
अजमेर. प्रदेश के कई बांधों में केज (पिंजरे) में मछली पालन की प्रचुर संभावना है। वर्तमान में सिर्फ चार जगह ही केज में मछलीपालन हो रहा है, जबकि मत्स्य विभाग को व्यक्तिगत तौर पर एक हजार केज लगाने का प्रस्ताव दिया गया है।
प्रदेश में मत्स्य पालन की ओर लोगों का रुझान बढऩे लगा है। अब इसमें रियल स्टेट और राज्य के बाहर के भी लोग जुड़ रहे है। वर्तमान में चार स्थानों पर केज में मछलियों का पालन हो रहा है। इसके लिए सरकार की ओर से नियमानुसार सब्सिडी भी उपलब्ध कराई जा रही है। केज में मछली पालन से पानी की गुणवत्ता पर भी प्रभावित नहीं होती है।
केज में पल रही मछलियां, यहां मिला प्रस्ताव
प्रदेश के भीलवाड़ा के बंद जयपुरा बांध में, बूंदी के गुढ़ा बांध में, बारां और झालावाड़ के बांधों में केज में मछली पालन हो रहा है। मत्स्य पालन विभाग को डूंगरपुर के सोम कमला अम्बा बांध में व्यक्तिगत तौर पर एक हजार केज लगाने का प्रस्ताव दिया गया है।
फैक्ट फाइल
- 6 गुणा 4 गुणा और 4 मीटर का एक केज
- 12 महिने जारी होता मछलियों का उत्पादन
- 40-50 क्विंटल प्रति केज में प्रतिवर्ष उत्पादन
यह है फायदा
- कम जगह में ज्यादा उत्पादन होता है।
- केश कॉप होने के कारण कभी भी बेच सकते है
- मजदूरी एवं अन्य खर्च भी कम लगता है।
- रोग निरोधक क्षमता ज्यादा होती है।
यहां हो सकता है उत्पादन
- अजमेर का बीसलपुर बांध
- उदयपुर के जयसमंद झील में
- बांसवाड़ा के माही बजाज सागर बांध
- डूंगरपुर के सोम कमला अम्बा बांध
- अलवर की सिलीसेढ़ बांध में
- पाली जवाई बांध में मछली पालन
- चित्तौडगढ़़ के राणा प्रताप सागर बांध
- उदयपुर के उदयसागर बांध में
- चितौड़ के गंभीरी बांध में
- भीलवाड़ा के कोठारी बांध
थाइलैंड और वियतनाम में देखा मछली पालन
प्रदेश के मत्स्य विभाग के अधिकारियों का दल करीब दो माह पहले थाइलैंड और वियतनाम में केज में मछली पालन की तकनीक आदि की जानकारी ली। केज में मछली पालन भारत में हो रहा है। प्रदेश में प्रारंभिक अवस्था में है, जबकि थाइलैंड और वियतनाम में यह विकसित अवस्था में बताया जा रहा है।
इनका कहना है...
प्रदेश में केज में मछली पालन की प्रचुर संभावना है। यहां कई बांधों में इसका पालन हो सकता है। डूंगरपुर के सोम कमला अम्बा बांध में व्यक्तिगत तौर पर एक हजार केज लगाने का प्रस्ताव विभाग को मिला है। दल ने थाइलैंड और वियतनाम में भी केज में मछली पालन की जानकारी ली है।
- डॉ. आर. एन. लामरोड, संयुक्त निदेशक मत्स्य पालन विभाग जयपुर
Published on:
03 Nov 2019 11:48 am
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