
law college admission in rajasthan
अजमेर. प्रथम वर्ष के दाखिलों को लेकर लगातार 17 वें साल राज्य के लॉ कॉलेज के हालात नहीं बदले हैं। सत्र 2021-22 शुरू हुए तीन महीन बीत चुके हैं। बार कौंसिल ऑफ इंडिया की मंजूरी के बिना कॉलेजों में दाखिले मुश्किल हैं।
राज्य के अजमेर, भीलवाड़ा, नागौर, पाली, बूंदी सहित अन्यलॉ कॉलेज को साल से बार कौंसिल ऑफ इंडिया से स्थाई मान्यता नहीं मिली है। कॉलेजों को डॉ. भीमराव अम्बेडकर लॉ यूनिवर्सिटी (पहले अलग-अलग विवि) से सम्बद्धता लेनी पड़ती है। सम्बद्धता पत्र और निरीक्षण रिपोर्ट बार कौंसिल को भेजी जाती है। कौंसिल की मंजूरी के बाद प्रथम वर्ष में प्रवेश होते हैं। इस बार भी कमोबेश हालात वैसे ही हैं।
मंजूरी मिले तो हो दाखिले
सरकार को प्रतिवर्ष बीसीआई को अंडर टेकिंग देनी पड़ती है। इसमें लॉ कॉलेज में स्थाई प्राचार्य, पर्याप्त व्याख्याता और स्टाफ और संसाधनों का जिक्र होता है। हालांकि ज्यादातर कॉलेज में शिक्षक और संसाधन पर्याप्त नहीं हैं। विधि शिक्षा का पृथक कैडर नहीं होने से स्थाई प्राचार्यों की नियुक्ति भी नहीं हो रही है। सभी कॉलेज ने सत्र 2021-22 में दाखिलों के लिए सरकार और बीसीआई को पत्र भेजा है।
हर साल होती है देरी
वर्ष 2005 में राज्य में 15 लॉ कॉलेज स्थापित हुए। पिछले 176 साल से प्रथम वर्ष के प्रवेश में विलंब हो रहा है। हर साल सम्बद्धता और बीसीआई की मंजूरी अक्टूबर-नवम्बर तक मिलती है। इसके बाद प्रवेश दिए जाते हैं। कॉलेज शिक्षा निदेशालय ने तो राज्य के लॉ कॉलेजों को ऑनलाइन प्रथम प्रवेश प्रक्रिया से भी नहीं जोड़ा है।
कॉलेजों में नहीं यह सुविधाएं
-खेलकूद स्पर्धाओंके लिए शारीरिक शिक्षक
-इंडोर-आउटडोर खेल मैदान-समारोह के लिए ऑडिटेरियम
-हाइटेक कंप्यूटर और भाषा लैब
-अजमेर सहित कई कॉलेज की नहीं चारदीवारी
-यूजीसी से नियमानुसार नैक ग्रेडिंग
-फाइव ईयर इंटीग्रेटेड एलएलबी कोर्स
-एक वर्षीय एलएलएलम कोर्स
फैक्ट फाइल...
राज्य में लॉ कॉलेज-15
अध्ययनरत विद्यार्थी-8 से 10 हजार
प्रथम वर्ष की सम्बद्धता-अम्बेडकर लॉ यूनिवर्सिटी
संचालित कोर्स-एलएलबी, एलएलएम, डिप्लोमा कोर्स
Published on:
01 Oct 2021 09:04 am
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