
रक्तिम तिवारी/अजमेर।
यह राज्य का ऐसा विश्वविद्यालय है, जिसका अपना कोई संघठक कॉलेज नहीं है। सरकार और यूजीसी भी बेफिक्र हैं। विश्वविद्यालय ने अपने लिए ऐसा कोई कॉलेज बनाने का विचार भी नहीं किया है। हम बात कर रहे हैं महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय की। जहां सिर्फ योजनाएं बनती हैं, पर प्रशासन अमली जामा पहनाने में फिसड्डी रहता है।
सिर्फ बनती यहां योजनाएं
विश्वविद्यालय सहित शहर के विद्यार्थी, शिक्षक पिछले तीस साल से संघठक कॉलेज बनाने की मांग करते रहे हैं। तकनीकी और सियासी कारणों से सरकार स्तर पर इसे कभी मंजूरी नहीं मिली। लिहाजा पिछले साल कार्यवाहक कुलपति ने विश्वविद्यालय का अपना संघठक कॉलेज खोलने की योजना बनाई। इसमें ऑनर्स स्तर के रोजगारोन्मुखी कोर्स चलाया जाना प्रस्तावित है। सात महीने में इस प्रस्ताव का अता-पता नहीं है। इसी तरह एफ.एम. रेडियो, सचिन तेंदुलकर स्टेडियम, शिक्षकों की भर्ती, बरसाती पानी को एकत्रित करने के लिए रूफ टॉप योजना, प्रतिवर्ष कैंपस में रोजगार मेला, विद्यार्थी परामर्श केंद्र जैसे प्रस्ताव भी फाइलों में घूम रहे हैं।
मिलती है पहचान
संघठक कॉलेज से विश्वविद्यालयों को पहचान मिलती है। इससे उनकी शैक्षिक स्थिति और विद्यार्थियों की संख्या बढ़ती है। दिल्ली यूनिवर्सिटी, मुम्बई यूनिवर्सिटी, कोलकाता विश्वविद्यालय, राजस्थान विश्वविद्यालय के संघठक कॉलेज हैं। इनके बूते ही यह विश्वविद्यालय अग्रणीय माने जाते हैं।
देंगे स्टार्ट अप में सहयोग
उद्यम लगाने के इच्छुक विद्यार्थी अथवा नौजवान को विश्वविद्यालय स्टार्ट अप योजना में सहयोग देगा। इसके तहत उनके प्रोजेक्ट का विश्वविद्यालय का दल तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक परीक्षण करेगा। दल की सहमति होने पर स्टार्ट अप के लिए नियमानुसार ऋण मुहैया कराया जाएगा। ताकि विद्यार्थी अपना उद्यम स्थापित कर सकें। यह योजना भी फिलहाल कागजों में ही घूम रही है।
यह योजनाएं भी होंगी शुरू
-ट्रांसजेंडर्स को विभिन्न पाठ्यक्रमों में नि:शुल्क शिक्षा
-90 अथवा 95 प्रतिशत अंकों वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की पढ़ाई का खर्च वहन करेगा विश्वविद्यालय
-खेलों में राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करने वाले विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षा
-विभिन्न युद्ध अथवा घटनाओं में शहीद कार्मिकों के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा
Published on:
27 Jan 2018 06:49 am
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