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पहले देना पड़ता साहब को खर्चा-पानी, तब ही कर पाते जेल में मौजमस्ती

सेंट्रल जेल अजमेर में बंदियों को सुविधा चाहिए तो जेल अधीक्षक और उनकी मिजाजपुर्सी में लगे नम्बरदार व जेल कर्मचारियों की जरूरत का ध्यान रखना होगा।

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Manish Kumar Singh

Aug 08, 2017

सेंट्रल जेल अजमेर में बंदियों को सुविधा चाहिए तो जेल अधीक्षक और उनकी मिजाजपुर्सी में लगे नम्बरदार व जेल कर्मचारियों की जरूरत का ध्यान रखना होगा। जेल अधीक्षक की मंशानुसार काम नहीं करने पर जेल में पाबंद बाड़ा (तन्हाई) की सजा भुगतनी पड़ सकती है। सजा का सिलसिला यहीं नहीं थमेगा। मोबाइल फोन सेवा उपलब्ध कराने व उसकी बरामदगी कानूनी कार्रवाई के बाद हाई सिक्योरिटी जेल जाना पड़ सकता है।

सीकर की ओपन जेल से अजमेर सेन्ट्रल जेल में ट्रांसफर होकर आए बंदी श्रीमाधोपुर रींगस सौन्थलिया (सीकर) निवासी पूर्व सरपंच मुकेश पुत्र घासीराम जाट को यहां इन्हीं हालात से गुजरना पड़ा। मुकेश ने सिविल लाइंस थाने को शिकायत दी है। पुलिस ने उसकी शिकायत को जांच में रखा है लेकिन बंदी की शिकायत ने अजमेर सेंट्रल जेल में चली आ रही कथित सुविधा शुल्क व्यवस्था की पोल खोल दी है।

पहले टेबल-कुर्सियां मंगवाई
मुकेश ने शिकायत बताया कि उसको अजमेर जेल में आते ही कपड़ा गोदाम की सफाई में लगा दिया। जेल में चीफ पद संभालने वाले जयसिंह ने जेल अधीक्षक संजय यादव के नाम पर उसको सेलो की ८ कुर्सियां, टेबल, चाय के कप मंगवाने की बात कही। उसने सारा सामान पहली मुलाकात पर मंगवा दिया।

डबल बैड के लिए २० हजार

दो-तीन माह बाद जयसिंह ने जेल अधीक्षक के लिए डबल बैड बनवाने के लिए रकम मांगी। उसने डबलबैड जेल में ही बनवाने की बात कही। उसने अपने होटल के मैनेजर जीतू के नम्बर जयसिंह को दे दिए। जयसिंह ने हैड भंवर सिंह के मोबाइल से कॉल कर जीतू क अजमेर बुलाया। जीतू उसको २० हजार रुपए देकर गया।

५० हजार में मिला मोबाइल

मुकेश ने बताया कि जेलर श्योजीराम मीणा ने उसकी जान को खतरा बताकर उसे १४ नम्बर बाड़े में डाल दिया। उसे एक माह तक रखा। इसी दरमियान तलाशी में केसरसिंह व सूरज गुर्जर से मोबाइल बरामद हुए लेकिन उसे डबल लॉकअप १३ नम्बर सेल में डाल दिया। नौ दिन तक रखने के बाद जयसिंह व भंवरसिंह ने बुलाया। जेल अधीक्षक को 'खर्चा-पानीÓ के नाम पर ५० हजार रुपए मांगे। रकम नहीं देने पर हाई सिक्योरिटी जेल भेजने की धमकी दी। हाई सिक्योरिटी जेल के डर से उसने ५० हजार रुपए दिलवा दिए। बदले में मोबाइल की सुविधा और परेशान नहीं करने की शर्त रखी। रकम पहुंचते ही जयसिंह ने उसे सिमकार्ड व चार्जर मुहैया करवा दिया।

'चांदनी के खाते में डलवाई रकम
तेरह नम्बर सेल से निकालने के दो माह बाद जयसिंह ने फिर ५० हजार रुपए मांगे। लेकिन इस बार उसने खाता नम्बर दिया। खाता चांदनी नाम की महिला का था। उसने अपने मैनेजर जीतू को खाता संख्या दे दी। जीतू ने ५० हजार रुपए डाल दिए। सात दिन बाद जयसिंह आया और मोबाइल ले गया। उसने मोबाइल वापस लेने व रसीद मैनेजर के पास मौजूद होने की बात कही तो दो दिन बाद मोबाइल वापस मिल गया। लेकिन दो दिन बाद जेल अधीक्षक संजय यादव आए और उसको धमकाया। चार दिन बाद उसे पता चला कि उसके खिलाफ सिविल लाइन्स थाने में मुकदमा दर्ज हो गया है, फिर उसे हाई सिक्योरिटी जेल भेज दिया।

मामले में जेल से बंदी मुकेश जाट की शिकायत मिली थी। शिकायत को जांच में रखा गया है।

-करणसिंह खंगारोत, थानाप्रभारी सिविल लाइंस अजमेर/p>