
Taragarh Fort, or just ramparts!
भारत के प्राचीनतम किलो में से एक तारागढ़ दुर्ग तक पहुंचना जल्द ही आसान होने वाला है। सालों से अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे इस किले पर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने रोप-वे निर्माण की योजना बनाई है। जिला कलक्टर गौरव गोयल ने रोव-वे शुरू करने के लिए भौगोलिक स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है। यह कार्य पुष्कर में सावित्री पहाड़ी पर रोप-वे संचालित करने वाली दामोदर एंड कम्पनी को ही सौंपा है। कम्पनी अगले 10 से 15 दिन में अपनी रिपोर्ट जिला कलक्टर को सौंपेगी।
अद्भुत सौंदर्य
चौहान वंश शासकों के वैभव और गौरवशाली इतिहास का साक्षी रहे तारागढ़ किले पर जाकर कई सुखद अनुभव लिए जा सकते हैं। यहां से न केवल शहर का विहंगम दृश्य निहारा जा सकता है बल्कि अरावली पर्वत श्रृंखलाओं के बीच सूर्यास्त का मनोरम दृश्य, गहरी घाटियां, आनासागर झील, सर्पीर्ली सड़कें और मुस्कुराती हुई आकृति वाली हैप्पी वैली जैसे अद्भुत नजारों को देखा जा सकता है। बारिश के दिनों में तो यहां छायी हरीतिमा हर किसी को अपनी और खींचती है। रोप-वे बनने के बाद तारागढ़ स्थित हजरत मीरां साहब की दरगाह में हाजिरी देने के लिए आने वाले बुजुर्ग जायरीन को भी सहुलियत मिल सकेगी।
यहां से है संभव
तारागढ़ तक रोप-वे का निर्माण अजयनगर स्थित सांईबाबा मंदिर के पास से या अंदरकोट स्थित ढाई दिन के झौंपड़े के पास से किया जा सकता है।
यह है तारागढ़
ऊंचाई- लगभग 700 फीट
निर्माण- 1033 ईसवी
निर्माता- अजयपाल चौहान
अन्य नाम- गढ़ बीठली
पुष्कर में यह व्यवस्था
-15 करोड़ की लागत से हुआ रोप-वे निर्माण
-93 रुपए प्रतिव्यक्ति है किराया
-16 ट्रोली वर्तमान में संचालित
-1 ट्रोली में 6 जनों के बैठने की व्यवस्था
तारागढ़ पर रोप-वे का प्रपोजल तैयार किया गया है। पुष्कर में कार्यरत कम्पनी की टीम फिजीकल स्टडी कर रही है। रोप-वे बनने से तारागढ़ पर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी।
-गौरव गोयल, जिला कलक्टर, अजमेर
Published on:
24 Nov 2016 09:23 am

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