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RPSC: चाहिए अध्यक्ष के साथ चार सदस्य, तब पूरा होगा कोरम

7 सदस्यीय है आरपीएससी। 1949 में हुई थी स्थापना।

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rpsc chairman and members

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अजमेर.

राजस्थान लोक सेवा आयोग को अध्यक्ष सहित चार नए सदस्यों की जरूरत है। एक तरफ अध्यक्ष पद पर पुलिस महानिदेशक डॉ. भूपेंद्र सिंह प्रबल दावेदार बताए जा रहे हैं। वहीं सदस्यों के नियुक्ति पर भी सरकार अंदरखाने विचार कर रही है।

वर्ष 1949 में राजस्थान लोक सेवा आयोग सेवा का गठन किया गया था। आयोग में शुरुआत से अध्यक्ष सहित पांच सदस्य होते थे। कांग्रेस सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल (2013) में दो सदस्यों की संख्या बढ़ा दी। इससे आयोग सात सदस्यीय हो गया है।

मौजूदा वक्त सिर्फ तीन सदस्य
आयोग में मौजूदा वक्त डॉ. शिवसिंह राठौड़, राजकुमारी गुर्जर और रामूराम राइका ही सदस्य हैं। पूर्व सदस्य रहे डॉ. आर. डी. सैनी, डॉ. के. आर. बगडिय़ा और सुरजीत लाल मीना का कार्यकाल पिछले साल समाप्त हो चुका है। इस लिहाज से आयोग में चार सदस्यों के पद रिक्त हैं।

ये है नियुक्ति नियम
नियमानुसार आयोग में अध्यक्ष सहित सदस्य छह वर्ष अथवा 62 वर्ष की आयु पूरी होने तक रह सकते हैं। राज्य सरकार वरिष्ठतम आईएएस, आईपीएस, विश्वविद्यालय के कुलपति, शिक्षाविद् को अध्यक्ष अथवा सदस्य नियुक्त कर सकती है। नियुक्ति से पहले आर्मी और पुलिस इंटीलेजेंस से संबंधित व्यक्ति के चाल-चलन और सेवाकाल की रिपोर्ट ली जाती है। कोई मुकदमा-निलंबन अथवा कारावास सजा प्राप्तकर्ता व्यक्ति की इन पदों पर नियुक्ति नहीं होती है।

सदस्यों का इंतजार
आयोग को चार नए सदस्यों का ज्यादा इंतजार है। अव्वल तो आरएएस मुख्य परीक्षा-2018 सहित अन्य परीक्षाओं के साक्षात्कार होने हैं। तिस पर सरकार से नई अभ्यर्थनाएं-भर्ती परीक्षाएं, विभागों की डीपीसी भी करानी हैं। आयोग इन कार्यों के लिए मौजूदा तीनों सदस्यों पर ही निर्भर है। सदस्यों की कमी के चलते पिछले दिनों साक्षात्कार और भर्ती परीक्षाएं स्थगित किए गए थे।

नहीं मिला कभी 'सातवां सदस्य
कहने को आयोग सात सदस्यीय है। लेकिन सातवें सदस्य का पद पिछले छह साल से रिक्त है। ना पूववर्ती भाजपा और ना मौजूदा कांग्रेस सरकार ने आयोग में सातवें सदस्य की नियुक्ति की है।