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2016 से नहीं किया आरपीएससी ने ये काम, टूट रहे हजारों लोगों के सपने

परेशानियों को देखते हुए आयोग के लिए भर्ती परीक्षाएं कराना और कलैंडर तय करना आसान नहीं है।

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recruitment calender of rpsc

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रक्तिम तिवारी/अजमेर।

भर्तियों के कलैंडर को लेकर राजस्थान लोक सेवा आयोग के कदम दो साल से थमे हुए हैं। 2016 के बाद आयोग केवल पुरानी भर्तियों के सहारे चल रहा है। नया कलैंडर बनाने में किसी अध्यक्ष अथवा सचिव ने रुचि नहीं ली है। विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के विवाद, आरक्षण संबंधित परेशानियों को देखते हुए आयोग के लिए भर्ती परीक्षाएं कराना और कलैंडर तय करना आसान नहीं है।

राजस्थान लोक सेवा आयोग आरएएस एवं अधीनस्थ सेवा भर्ती परीक्षा सहित कॉलेज लेक्चरर, स्कूल व्याख्याता भर्ती परीक्षा, कृषि, कारागार, कनिष्ठ लेखाकार और अन्य भर्ती परीक्षाएं कराता रहा है। कार्मिक विभाग, संबंधित विभाग और सरकार से अभ्यर्थना, पदों का वर्गीकरण मिलने के बाद आयोग भर्ती परीक्षाओं का आयोजन करता है। साथ ही भर्ती परीक्षाओं का कलैंडर भी तय करता है।

विवादों के साए में परीक्षाएं...

आजादी के बाद राज्य सरकार ने आयोग का गठन सिर्फ आरएएस एवं अधीनस्थ सेवा भर्ती परीक्षा कराने के लिए किया था। तत्कालीन भाजपा सरकार ने वर्ष 2005-06 से इसे तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा का काम सौंपा। इसके बाद प्रथम और द्वितीय श्रेणी स्कूल व्याख्याता, कृषि, कारागार, मेडिकल, तकनीकी शिक्षा, पुराततत्व एवं संग्रहालय विभाग और अन्य महकमों की भर्तियां भी आयोग को सौंपी गई। कुछेक परीक्षाओं को छोड़कर आयोग को अधिकांश में परेशानियां झेलनी पड़ी हैं।

दो साल से थमी रफ्तार

दो साल से आयोग ने भर्ती कलैंडर नहीं बनाया है। इसके लिए सरकार से भर्तियां नहीं मिलने, स्थाई अध्यक्ष नहीं होने जैसे तर्क दिए जाते रहे हैं। अध्यक्ष कार्यकाल खत्म होने या इस्तीफा देने पर आयोग के सबसे वरिष्ठतम सदस्य को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया जाता रहा है। पिछले साल सरकार ने ढाई महीने तक ना किसी वरिष्ठ सदस्य को विधिवत कार्यभार सौंपा।

खुद को मानते यूपीएससी से आगे

भर्तियों के मामले में आयोग खुद को यूपीएससी से भी अव्वल मानता है। जबकि स्थिति बिल्कुल उलट है। संघ लोक सेवा आयोग का नियमित भर्ती कलैंडर बन रहा है। जबकि आयोग पिछली परीक्षाएं हीं नहीं निबटा पाया है। संघ लोक सेवा आयोग की भर्तियों का देशभर में इंतजार रहता है। राजस्थान लोक सेवा आयोग की भर्तियों में विवादों के चलते अभ्यर्थियों की रुचि घट रही है।