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पुष्कर सरोवर समेत अजमेर की छह झीलों को बचाएं

झीलों को मूल स्वरूप में लाने का किया आग्रह, पुष्कर के सामाजिक कार्यकर्ता पाराशर ने नोडल अधिकारी डॉ. शर्मा से की मुलाकात

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पुष्कर सरोवर समेत अजमेर की छह झीलों को बचाएं

पुष्कर सरोवर समेत अजमेर की छह झीलों को बचाएं

अजमेर. पुष्कर सरोवर सहित अजमेर की छह झीलों के संरक्षण एवं मूल स्वरूप को बचाने के लिए हाईकोर्ट की ओर से गठित राज्य झील संरक्षण समिति के नोडल अधिकारी डॉ. समिति शर्मा से आग्रह किया गया। पुष्कर सरोवर में सीवरेज का पानी रोकने के साथ दायरे में अनाधिकृत निर्माण को हटाने की मांग की गई।अजमेर जिले में आनासागर, फॉयसागर झील, पाल बीसला, ब्रह्म पुष्कर सरोवर के संरक्षण, डूब क्षेत्र व कैचमेंट को संरक्षित रखने को लेकर पुष्कर के सामाजिक कार्यकर्ता व सटी लेवल मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्य अरुण पाराशर ने नोडल प्रभारी डॉ. शर्मा से मिलकर उन्हें जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय झील परियोजना के तहत वर्ष 2008 एवं 2009 में वन विभाग की ओर से नाग पहाड़ी, पुष्कर घाटी की पहाडि़यों में गेबियन स्ट्रक्चर एवं चैक डेम गुणवत्ताविहीन बनाए जाने से बरसात का पानी रुक कर सरोवर में आता है। गेबियन स्ट्रक्चर एवं चैक डेम की गुणवत्ता की भी जांच करवाई जानी चाहिए। आनासागर के कैचमेंट एरिया व डूब क्षेत्र में पालिका व राजस्व विभाग की मिलीभगत से भू-माफिया की ओर से पर्यावरण और प्रकृति को मिटाकर बिना भू-उपयोग परिवर्तन व बिना नक्शा स्वीकृति के अवैध आवासीय कॉलोनियां काटी जा रही हैं। कई रसूखदारों की ओर से अवैध होटल, गेस्ट हाउस रिसॉर्ट बना दिए गए हैं। इन अवैध निर्माण का सीवरेज बरसाती पानी के साथ बहकर भविष्य में पवित्र सरोवर को ही दूषित करेगा।

उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय की डबल बैंच ने अजमेर जिले की समस्त छह झीलों के संरक्षण एवं कैचमेंट डूब क्षेत्र को संरक्षित रखने के निर्णय 18 फरवरी 2009 के बाद अजमेर जिला कलक्टर की ओर से आदेश 20 फरवरी 2009 के तहत सभी छह झीलों के डूब और कैचमेंट एरिया को नो कंस्ट्रक्शन जोन घोषित कर इन क्षेत्रों में बिना भू उपयोग परिवर्तन और निर्माण स्वीकृति प्राप्त किए बिना किसी भी प्रकार के निर्माण पर रोक लगाने का आदेश स्थानीय नगर पालिका और राजस्व विभाग को प्रदान कर रखे हैं। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन इन आदेशों की अवहेलना कर रहा है। उन्होंने त्रिपुष्कर सरोवरों को बचाने की गुहार लगाई है।