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Social work: इस गांव में होगी तालाब की खुदाई, बचाएंगे बरसात का पानी

बरसात शुरू होने से पहले गांव के तालाब की खुदाई कराई जाएगी। इसका जीर्णोद्धार कराकर भराव क्षमता बढ़ाई जाएगी।

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narvar village

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अजमेर.

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के तत्वावधान में गोद लिए गांव नरवर में ग्रामीणों को मास्क, सूखे काढ़े के पैकेट और सेनेटाइजर बांटे गए। विश्वविद्यालय ने गांव के बूल्या तालाब की खुदाई और बरसात का पानी सहेजने का आह्वान किया।

कुलपति प्रो. आर .पी.सिंह ने कहा कि नरवर गांव विश्वविद्यालय का अभिन्न हिस्सा है। लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाव के साथ-साथ धूम्रपान, गुटखा और अन्य दुव्र्यसन त्यागने चाहिए। बरसात शुरू होने से पहले गांव के तालाब की खुदाई कराई जाएगी। इसका जीर्णोद्धार कराकर भराव क्षमता बढ़ाई जाएगी। उन्होंने लोगों से घरों में भी बरसात का पानी संग्रहित करने की अपील की।

बढ़ाएं सामाजिक सरोकार
शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय जैन ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक सरोकार में अग्रणीय रहना चाहिए। सरपंच धर्मेन्द्र चौधरी ने स्वागत किया। वैद्य चंद्रकांत चतुर्वेदी ने औषधीय काढ़ा बनाने की जानकारी दी। डीन छात्र कल्याण प्रो. प्रवीण माथुर ने कहा कि जुलाई में पौधरोपण कराया जाएगा। नोडल अधिकारी प्रो. सुभाष चंद्र ने धन्यवाद दिया।

इधर कोरोना वायरस, उधर भड़ल्या नवमी पर अबूझ सावा

अजमेर. भड़ल्या नवमी का अबूझ सावा सोमवार को होगा। जिले और शहर में कई वैवाहिक कार्यक्रम होंगे। कोरोना संक्रमण और सरकार की पाबंदियों के चलते गाजे-बाजे से बारात निकालने, बड़े सामूहिक भोज पर प्रतिबंध है। इसके चलते लोगों को 50 मेहमानों और सीमित संसाधनों में कार्यक्रम करने होंगे।

14 जनवरी को मकर संक्रांति से वैवाहिक और अन्य कार्यक्रमों की शुरुआत हुई थी। भड़ल्या नवमी यानि सोमवार तक लोग वैवाहिक कार्यक्रम कर सकेंगे। इसके बाद 1 जुलाई से देवशयन करेंगे। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्य वर्जित रहेंगे।

विवाह का अबूझ मुर्हूत
हिंदू मान्यताओं के अनुसार कार्तिक एकादशी, आखातीज, बसंत पंचमी की तरह भड़ल्या नवमी विवाह का अबूझ मुर्हुत माना जाता है। इन मुर्हूत पर पूरे देश में सैकड़ों वैवाहिक कार्यक्रम होते हैं। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते सरकार ने कई पाबंदियां लगाई हैं।

1 जुलाई से देवशयन
धार्मिक मान्यता के अनुसार 1 जुलाई से देवशयन करेंगे। इस बार अधिक मास के चलते यह अवधि पांच महीने की होगी। इस अवधि में कोई भी विवाह, गृह प्रवेश, नव कारोबार और अन्य कार्यक्रम नहीं होंगे। कार्तिक माह में देवउठनी एकादशी से वापस शुभ कार्य प्रारंभ होंगे।