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ऐसे फौजी को हजारों सैल्यूट,जो दूसरों की जान बचाने में खुद हो गया कुर्बान,पिता बोले-पोते को भी सेना में भेजूंगा…

सेना से रिटायर फौजी पिता ने बेटे को नम आंखों से किया सैल्यूट,भारत माता के जयकारों के बीच नारनोद के सपूत अनिल भाम्बू की अंत्येष्टि,सूबेदार के पद पर तैनात थे भाम्बू

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ऐसे फौजी को हजारों सैल्यूट,जो दूसरों की जान बचाने में खुद हो गया कुर्बान,पिता बोले-पोते को भी सेना में भेजूंगा...

ऐसे फौजी को हजारों सैल्यूट,जो दूसरों की जान बचाने में खुद हो गया कुर्बान,पिता बोले-पोते को भी सेना में भेजूंगा...

अजमेर/झुंझुनूं. यदि यह जांबाज फौजी सेना के टाटरा वाहन को नहीं रोकता तो सामने मकान में करीब आठ-दस लोग हताहत हो जाते। उनकी जान बचाने के लिए वह खुद कुर्बान हो गया। इस फौजी की यह वीरता देख हर किसी को फक्र है।

झुंझुनंू जिले के चिड़ावा उपखंड स्थित नारनोद निवासी सूबेदार अनिल पुत्र रामदेवाराम भाम्बू रविवार रात सूरतगढ़ के गांव राईयावाली समीप सेना के वाहन टाटरा में सवार थे। उनके साथ चालक सिपाही देवकुमार व राहुल भी थे। गांव राईयावाली के ढलान में टाटरा वाहन बंद हो गया। स्टेयरिंग ने भी काम करना बंद कर दिया।

राहुल कुमार ने चालक देवकुमार को टायरों के आगे स्टोपर लगाने के लिए कहा तो चालक नीचे कूद गया। चालक से टाटरा वाहन नहीं रुका। इस दौरान हिम्मत दिखाकर फूर्ति से सूबेदार अनिल कूदकर गया। बाद में स्टोपर लगाकर वाहन को रेकने लगा,लेकिन वह टाटरा (ट्रोला) के पहिये के नीचे कुचल गया।

मृतक सूबेदार नेक इंसान

मृतक सूबेदार के साथी नायब सूबेदार गुमानसिंह ने बताया कि अनिल एक बहादुर व लोगों की मदद करने वाले नेक इंसान थे। उन्होंने दूसरों की जान बचाते हुए अपनी जान की कुर्बानी दी है। अगर वह सेना की टाटरा गाड़ी के आगे स्टोपर नहीं लगाते तो वह सामने के एक मकान में घुस जाती। इसमें करीब 10 से 12 लोग रहते थे। ऐसे में इनकी जान जा सकती थी।

15 दिन पहले ही गए थे ड्यूटी पर

लोगों की आंखें छलक पड़ी

राजकीय सम्मान के साथ मंगलवार को उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया गया। बेटे अनिल भाम्बू को जब पूर्व सैनिक पिता ने सेल्यूट किया तो वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें छलक पड़ी। पिता सेवानिवृत्त सूबेदार रामदेवाराम ने कहा कि बेटे की कुर्बानी देश के लिए हुई है। मैं पोते निमित भाम्बू को भी देश की सेवा में भेजूंगा।


15 दिन पहले ही ड्यूटी पर गए थे

सूबेदार अनिल भाम्बू हिसार मैकेनाइज में सिख रेजिमेंट प्रथम में तैनात थे। डेढ़ माह की छुट्टी बिताकर 15 दिन पहले ही ड्यूटी पर गए थे। अनिल का शव सोमवार को पोस्टमार्टम करा सेना के अधिकारियों को सौंप दिया था। मंगलवार को सूबेदार की पार्थिव देह सेना के अधिकारी नायब सूबेदार गुमानसिंह, हवलदार अशोक कुमार, कुलवीर सिंह उनके पैतृक गांव नारनोद में लेकर पहुंचे। पार्थिव देह जैसे ही आया तो घर में कोहराम मच गया। मां केसरी देवी, पत्नी अंकिता, बेटा निमित्त (15 ) दोनों बेटियों सहित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

बेटे को सौंपा तिरंगा

पार्थिव देह के साथ आए नायब सूबेदार गुमानसिंह व जिला सैनिक कल्याण अधिकारी चिड़ावा सुनील दत्त ने शहीद के बेटे निमित्त भाम्बू को तिरंगा सौपा। जयपुर से आई गार्ड ऑफ ऑनर की 20 जवानों की टीम ने सूबेदार नवीन कुमार की अगुवाई में गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

हजारों ग्रामीणों ने नम आंखों से किया नमन

सूबेदार के अंतिम संस्कार में चिड़ावा तहसीलदार अनिल मूंड, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी चिड़ावा सुनील दत्त, डब्लूओ भास्कर, यूनिट के कप्तान नारायणसिंह, सूबेदार रामनिवास, हवलदार मनोहरलाल, बनवारीलाल, सरपंच प्रतिनिधि अजित भाम्बू, भाजपा जिला उपाध्यक्ष राजेन्द्र भाम्बू, संजीव भाम्बू, रणधीरसिंह, सूबेदार विद्याधर, हनुमानसिंह, धर्मपालसिंह, रणवीरसिंह, कमलेश चाहर, अभिषेक , ईश्वरसिंह, श्रवण आदि ने शहीद के पार्थिव देह पर पुष्प चक्र व पुष्प अर्पित किए।