
happiness in life
अजमेर.
कुशल प्रशासन व जनकल्याण के बजाय जाति, धर्म तथा प्रलोभनों के माध्यम से सत्ता में आने से भारत संयुक्त राष्ट्र संघ की खुशहाली की रैंकिंग (हैप्पीनेस इंडेक्स) में गिरकर 140 वें स्थान पर आ गया है। फिनलैंड दुनिया का सबसे खुशहाल देश माना गया है। अमरीका 19, पाकिस्तान 67, चीन 93 व बांग्लादेश 125 वें स्थान पर है। देश में कोई भी दल खुशहाली इंडेक्स की चर्चा नहीं करता । यह बात अजमेर इंजीनियर्स इंस्टीट्यूट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित वेबीनार में पूर्व बैंकर और लेखक वेद माथुर ने कही।
कैसे रहें खुश विषय पर आयोजित व्याख्यान में उन्होंने कहा कि लोगों की बदहाली के लिए राजनेता, नौकरशाही के अलावा मतदाता भी जिम्मेदार है। मतदाता कार्य कुशलता व ईमानदारी के बजाय जाति व प्रलोभन के आधार पर वोट देते हैं। जबकि उन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, परिवहन, भ्रष्टाचार मुक्त तंत्र जैसे मानदंडों के आधार पर मतदान करना चाहिए। माथुर ने कहा कि छोटी छोटी खुशियां ही मिलकर बड़ी बनती हैं। परिवार और दोस्तों का साथ अच्छी फिल्म और मजेदार टीवी शो, बागवानी, कुकिंग, संगीत मन को आनंदित करते हैं। अपने काम में उस्ताद बन कर जिंदगी का मजा लिया जा सकता है।
बंद करें चिंता की फैक्ट्री
लोग अपने दिमाग में चिंता की फैक्ट्री खोल कर रखते हैं। यह घर-परिवार की चिंता का उत्पादन करती रहती है। सुखी रहने के लिए इस फैक्ट्री में तालाबंदी कर देनी चाहिए। हम जो ब्रह्मांड को देंगे वही वापस मिलेगा। दूसरोंकी सहायता व सराहना करेंगे तो बदले में यही मिलेगा। दुनिया में यात्रा कोआनंद और प्रसन्नता का बेहतरीन जरिया माना जाता है। हमें अधिकाधिक भ्रमण करना चाहिए।
खुद हंसें, दूसरों को हंसाएं
हंसना और और हंसाना खुशी का सबसे बड़ा स्रोत है। जब भी तनाव में हो तो हास्य कविताएं सुनें, यूट्यूब पर स्टैंडअप कॉमेडियन के वीडियो देखें । कार्यक्रम में बसंत जोशी ने स्वागत किया। अजमेर इंजीनियर्स इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष ए के गुप्ता ने गतिविधियों की जानकारी दी। सचिव अमोल अरोड़ा ने धन्यवाद दिया।
Published on:
28 Jun 2020 07:40 am
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