
पत्रिका लोगो
अजमेर. देश पर जब-जब विपत्ति आई है तब-तब क्षत्रिय समाज ने उसका दृढ़ता से सामना किया है। देश और समाज की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहने वाले क्षत्रिय समाज के लोगों ने कोरोना संक्रमण काल में भी आमजन की हरसंभव मदद की है। जरूरंतमदों तक खाना पहुंचाने की बात हो या पशु-पक्षियों के चारे-दाने की. . . सभी में सहयोग किया है। राजस्थान पत्रिका के सोशल कनेक्ट अभियान के तहत राजपूत समाज के प्रबुद्धजनों ने वेबमीटिंग में विचार साझा किए। प्रबुद्धजनों ने राजस्थान पत्रिका को साधुवाद देते हुए समाज के लोगों को एक मंच पर लाने का प्रयास सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि क्षत्रिय कोई जाति नहीं बल्कि धर्म है. . . इसलिए कोरोना महामारी में समाज ने लोगों की सेवा कर अपना धर्म निभाया है। कोरोना ने सीमित सुविधा, सीमित साधन और सीमित आवश्यकता के साथ जीना सिखाया है। इस महामारी से आत्मानुशासन से ही बचा सकता है।
कोरोना महामारी ने किस तरह सीमित सुविधा और संसाधन में जीवित रह सकते हैं यह सिखाया है। अब हमें अनुभव के आधार पर काम करने की जरूरत है। कम खर्चे में काम चल सकता है यह कोरोना ने सिखाया है। लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों को खाद्य पैकेट और दूध तक उपलब्ध कराया है। जिला प्रशासन से बिल्कुल सहयोग नहीं मिला। लॉकडाउन के दौरान जिन लोगों की नौकरियां चली गई उन्हें भी सहायता मिलनी चाहिए।
- सुरेन्द्र सिंह शेखावत, पूर्व सभापति व पार्षद
लॉकडाउन के दौरान क्षत्रिय सभा ने समाज से एक लाख रुपए एकत्र कर समाज और गैरसमाज के जरूरतमंद परिवारों को भोजन सामग्री उपलब्ध कराई गई। प्रधानमंत्री राहत कोष में भी राशि जमा कराई गई। राजपूत समाज का युवा ज्यादातर पर्यटन और होटल व्यवसाय से जुड़ा है। इनसे जुड़े लोगों के लिए राहत पैकेज की घोषणा की जानी चाहिए।
- बहादुरसिंह शक्तावत, सचिव क्षत्रिय सभा केकड़ी
राजपूत समाज सदियों से मदद के लिए हमेशा तत्पर रहा है। कोरोना संक्रमण में आमजन की सहायता के लिए बढ़चढ़ कर सहयोग और सहायता की है। समाज ने जरूरतमंद लोगों और मूक मवेशियों के लिए चारे आदि की व्यवस्था की है। कोरोना संक्रमण में लगे समाज के सभी कोरोना वॉरियर्स का साधुवाद।
- महेन्द्रसिंह मझेवला, अध्यक्ष जिला सरपंच संघ और कड़ैल सरपंच
कोरोना महामारी के दौरान 160 परिवारों को खाद्य सामग्री के पैकेट उपलब्ध कराए गए। इसके साथ ही 50 गायों को 3 क्विंटल चारा डलवाए जान के साथ ही खेली बनवा कर टिनशेड भी लगाए गए।
- हेमसिंह मझेवला, सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी पुष्कर
राजपूत समाज हमेशा से निस्वार्थ सेवा के लिए जाना जाता है। समाज ने वैश्विक संकट के दौर में भी पूरी दृढ़ता के साथ जरूरतमंदों की सेवा की है। देश-प्रदेश की सरकार आरक्षण के नाम पर योग्यता को दरकिनार कर कुठाराघात करना बंद कर राजपूत समाज के सर्वांगीण विकास व आत्मनिर्भरता के लिए नीति लागू करें।
-ज्योति कंवर राठौड़, वार्डपंच भांवता
राजपूत सभा समिति सभा भवन को क्वॉरंटीन सेंटर बनाने के लिए देने की पेशकश की थी। समिति सचिव सुमेर सिंह ने स्वयं को कोरोना वैक्सीन ट्रॉयल के लिए उपलब्ध करवाने का प्रस्ताव दिया है। समाज के लोगों ने राशन किट और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था की।
- सुमेरसिंह राठौड़, सचिव राजपूत सभा समिति किशनगढ़
लॉकडाउन के दौरान दो लड़कियों की शादी कैंसिल होने पर दोनों परिवारों को समझाइश कर उपखण्ड अधिकारी की परमिशन लेकर विवाह करवाया। इससे खर्चा भी कम हुआ। बचे हुए पैसों से फूड पैकेट खरीदकर गरीब लोगों तक पहुंचाए गए। बार एसोसिएशन से भी जरूरतमंदों को भोजन, पशुओं के लिए चारा और पक्षियों के लिए दाने की व्यवस्था की गई।
- किशोरसिंह, एडवोकेट किशनगढ़
क्षत्रिय समाज देश पर जब-जब विपत्ति आई उससे मुकाबले के लिए हमेशा अग्रणी रहा है। प्रताप नगर लोहाखान क्षेत्र में संपन्न परिवारों की ओर से गरीब परिवारों को राशन, खाना और दूध उपलब्ध करवाया। क्षत्रिय समाज में हमेशा से अन्य समाजों का विश्वास रहा है, इसलिए समाज की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। राजस्थान पत्रिका के इस सार्थक प्रयास के लिए साधुवाद।
- नरेन्द्र सिंह भंवाड़ा, अध्यक्ष प्रताप नगर विकास समिति अजमेर
क्षत्रिय कोई जाति नहीं बल्कि एक धर्म है। इसलिए यह धर्मपालन ही था। कोरोना ने जीवन को काफी हद तक पुनर्परिभाषित किया है। सीमित सुविधा, सीमित साधन और सीमित आवश्यकता के साथ जीना सिखाया है। कोरोना ने यह बता दिया है कि मनुष्य की जरूरत और इच्छाओं में काफी अंतर है। आने वाले समय में स्वअनुशासन की बहुत जरूरत रहेगी।
- इन्दरसिंह बागावास, ब्यावर
कोरोना संक्रमण में आमजनता की मदद करने वाले साधुवाद के पात्र हैं। पार्षद होने के नाते 67 दिनों तक जरूरतमंद लोगों को भाजन उपलब्ध कराया और 554 परिवारों को खाद्य सामग्री विधायक, महापौर और स्वयं के स्तर पर वितरण किया गया। सावधानी और आत्मबल से कोरोना को हम सब मिलकर परास्त कर सकते है।
- राजेन्द्र सिंह राठौड़, पार्षद अजमेर
कोरोना महामारी ने सम्पूर्ण जीवन के साथ प्रकृति को भी बदल दिया है। महामारी में ब्यावर करणी सेना का सबसे सराहनीय पहल मृत्युभोज को समाज से समाप्त करने के निर्णय की रही। मोती नगर क्षेत्र में समाजबंधु की पुत्री के देहांत के बाद 1100 पैकेट भोजन तैयार करवाकर गरीबों को वितरित कराया।
- सुधीर सिंह तोमर, ब्यावर
कोरोना संकट त्रासदी में सर्वाधिक जरूरत सरकार से अधिक समाज और सामूहिक चिंतन की है। लॉकडाउन के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को प्रोत्साहित किया। सामाजिक कुरीतियों पर रोक व सामाजिक आयोजनों में दिखावे-प्रदर्शन पर रोक लगानी चाहिए। राजस्थान पत्रिका का समाज के लोगों को एक मंच पर संवाद का मौका देने के लिए साधुवाद।
- ज्वालाप्रताप सिंह, निदेशक खंगारोत एण्ड चौहान क्लासेज अजमेर
कोरोना संक्रमण में पिचोलिया सरपंच अनूप कंवर के साथ मिलकर पूरी पंचायत के लोगों और जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई गई। समाज के लोग लम्बे समय से मृत्युभोज पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास कर रहे थे, वह इस कोरोना काल में काफी हद तक बंद हो गया है।
- ओमसिंह राठौड़, पिचोलिया
जरूरंतमदों की सेवा करना ही सच्ची राष्ट्रसेवा है। इसे ही अपना क्षत्रिय धर्म समझ कर राजपूत करणी सेना व राजपूत सभा ब्यावर ने लॉकडाउन के समय जरूरतमंद परिवारों तक भोजन के 2100 पैकेट व करीब 200 खाद्य सामग्री के किट वितरण कर सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन किया।
- अजीतसिंह चांदारूण, अध्यक्ष राजपूत करणी क्लब ब्यावर
कोरोना महामारी के संकटकाल में राजस्थान पत्रिका के द्वारा श्रमिकों व किसानों के समक्ष आ रही समस्याओं को प्रमुखता से उठाने और निराकरण का प्रयास प्रशंसनीय है। गांवों में कृषि आधारित खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां लगाकर श्रमिकों के लिए स्वरोजगार जैसे डेयरी उद्योग, कुटीर उद्योग खुलवाने व उनके लिए बाजार की व्यवस्था करवाने की आवश्यकता है।
- पुष्पेन्द्र सिंह, पूर्व सरपंच सावर
राजपूत समाज संकट के समय हमेशा सेवा के लिए आगे रहा है। युवाओं की ओर से रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों की सहायता में राहत सामग्री व फेस मास्क बांटे। पीएम फंड में सहायता राशि जमा कराने के लिए लोगों को जागरूक किया। राष्ट्रधर्म को निभाते हुए सभी की सहायता करें व सरकार के निर्देशों की पालना करें।
- दीपक सिंह राठौड़, जिलाध्यक्ष भाजपा युवा मोर्चा
लॉकडाउन से दौरान देश की आर्थिक गतिविधियों को नुकसान पहुंचा है। हमें स्वदेशी वस्तुओं का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए। इस महामारी ने सम्पूर्ण मानव जीवन के साथ-साथ प्रकृति को भी बदल दिया। राजपूत समाज ने महामारी के दौरान जरूतमंदों की हरसंभव सहायता की है।
- महेन्द्रसिंह, बिजयनगर
Published on:
04 Jun 2020 05:15 pm
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