13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

World Bicycle Day: अजमेराइट्स का साइकिल क्रेज, रोड पर दिखतीं स्मार्ट साइकिल

बढ़ते प्रदूषण और पेट्रोल-डीजल की कीमतों को देखते हुए साइकिल फिर लोकप्रिय हो रही हैं।

2 min read
Google source verification
world bicycle day 2022

world bicycle day 2022

रक्तिम तिवारी.

अजमेराइट्स में साइकिल का क्रेज बढ़ रहा है। कियोस्क से किराए पर लेकर साइकिल चलाने के अलावा कई लोग स्मार्ट साइकिल खरीद रहे हैं। बढ़ते प्रदूषण और पेट्रोल-डीजल की कीमतों को देखते हुए साइकिल फिर लोकप्रिय हो रही हैं।
अजमेर में 1947 से 90 के दशक तक साइकिल चलाने वालों की खासी तादाद रही थी। खासतौर पर रेलवे के केरिज-लोको वर्कशॉप, रोडवेज सहित अन्य महकमों के कार्मिकों की आवाजाही साइकिल से होती। श्रमिक वर्ग भी साइकिल से आवाजाही करते थे। बाइक, स्कूटी और अन्य दोपहिया वाहनों का क्रेज बढऩे से साइकिल धीर-धीरे शौकियाना बनकर रह गई।
अब फिर से बढ़ा क्रेज
सेहत के प्रति जागरुकता और चुस्त-दुरुस्त रहने के लिए लोगों में साइकिल का क्रेज फिर बढ़ रहा है। चार-पांच साल पहले अजमेर में आनासागर चौपाटी, वैशाली नगर, जीसीए सहित कई स्थानों पर साइकिल कियोस्क खुल चुके हैं। बच्चे, युवा, बालिकाएं-महिलाएं और बुजुर्ग यहां से किराए पर साइकिल लेकर सड़कों पर दौड़ाते दिखते हैं। यह मॉर्निंग वॉक का हिस्सा भी बन चुकी है।

पहले कलक्टर जाते थे साइकिल से

आजादी के बाद अजमेर के पहले कलक्टर रहे डी.सी. जोसफ अपनी साइकिल की सवारी के लिए मशहूर थे। वे सिविल लाइंस स्थित घर से कलक्ट्रेट तक रोजाना साइकिल पर सवारी करते थे। कोई सरकारी दौरा होने पर ही वाहन का इस्तेमाल करते थे। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्हें कई साल तक साइकिल चलाई।

स्मार्ट साइकिल की बढ़ी डिमांड
शहर में स्मार्ट साइकिल की डिमांड बढ़ गई है। खासतौर पर गियर, शॉक आब्जर्वर वाली साइकिल की डिमांड ज्यादा है। बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों में साइकिल खरीदने का शौक बढ़ गया है। स्मार्ट साइकिल की कीमत 10 से 12 हजार से 50 हजार तक है। बगैर गियर वाली साधारण साइकिल भी 5 से 8 हजार तक उपलब्ध हैं।

कई बुजुर्ग चलाते नियमित साइकिल
शहर में 80-85 साल के कई बुजुर्ग नियमित साइकिल चला रहे हैं। यह वैशाली नगर, एलआईसी कॉलोनी, हाथीभाटा, नया बाजार, केसरगंज, शास्त्री नगर सहित अन्य इलाकों में रहते हैं। उम्रदराज होने के बावजूद साइकिल चलाने का शौक बरकरार है। यही उनकी फिटनेस का राज भी है।

...यहां गुम हुआ नायाब प्रस्ताव
सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय कैंपस में विद्यार्थी, शिक्षक और कर्मचारियों के लिए साइकिल चलाने की योजना गुम हो गई है। जबकि तीन साल पहले कॉलेज ने सौ साइकिल खरीदने का फैसला किया था। योजना के अनुसार मुख्य द्वार पर साइकिल उपलब्ध कराई जानी थी।। शिक्षक, विद्यार्थी और कर्मचारी के लिए आई-कार्ड जमा कराने के बाद कैंपस में साइकिल चलाने का प्रस्ताव था। लेकिन यह गुम हो गया है।