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हिन्दुस्तान की फिजाओं में गूंज रही इकबाल की शायरी

अल्लामा इकबाल केवल एक शायर नहीं थे, बल्कि वह एक महान दार्शनिक भी थे। उन्होंने अपनी शायरी के द्वारा अवाम में जागरूकता पैदा की।

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Bhanu Pratap Singh

Nov 10, 2016

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अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पालीटेक्निक में उर्दू के मशहूर शायर अल्लामा इकबाल के जन्म दिवस पर आयोजित उर्दू डे कार्यक्रम हुआ। इस मौक पर एएमयू के सहकुलपति ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) सैयद अहमद अली ने कहा कि अल्लामा इकबाल केवल एक शायर नहीं थे, बल्कि वह एक महान दार्शनिक भी थे। उन्होंने अपनी शायरी के द्वारा अवाम में जागरूकता पैदा की।

घरों में भी उर्दू का माहौल पैदा करें
अहमद अली ने कहा कि अल्लामा इकबाल द्वारा रचित तराना “सारे जहॉ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा” आज भी रोंगटे खड़े कर देता है और गर्व से सीना फूल जाता है। ब्रिगेडियर अली ने कहा कि उर्दू के विकास के लिए आवश्यक है कि स्कूल के अलावा घरों में भी उर्दू का माहौल पैदा करें और बच्चों को उर्दू सीखने के प्रति प्रेरित करें। सहकुलपति ने कहा कि उर्दू भाषा को किसी धर्म विशेष से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि यह भाषा इसी देश में पैदा हुई और यहीं पली बढ़ी है। ब्रिगेडियर अली ने कहा कि उर्दू की अहमियत से अपने आस-पास व निकट के लोगों को भी अवगत करायें।

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विज्ञान की पुस्तकों का उर्दू में अनुवाद होना आवश्यक
मुख्य अतिथि पूर्व सांसद एवं एएमयू के पूर्व छात्र मोहम्मद अदीब ने कहा कि कोई भी सभ्यता उसी समय तक जीवित रह सकती है, जब तक उस सभ्यता के लोग अपनी भाषा को सुरक्षित रख सकें। उन्होंने कहा कि उर्दू भाषा अनेक भाषाओं के शब्दों को लेकर बनी और इसने अन्य भाषाओं को भी शब्द प्रदान किये। उन्होंने कहा कि आज फिर से विज्ञान की पुस्तकों का उर्दू में अनुवाद होना आवश्यक है ताकि लोगों में वैज्ञानिक सोच व चिंतन पैदा हो सके।

फारसी के भी शायर थे इकबाल
इंजीनियरिंग संकाय के डीन प्रोफेसर मुमताज अहमद खान ने कहा कि उर्दू दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित होने चाहिए। उर्दू विभाग के डॉ. सिराज अजमली ने कहा कि इकबाल की शायरी हिंदुस्तान की फिजाओं में गूंज रही है और उनकी शायरी की अपनी अलग पहचान है। उन्होंने कहा कि इकबाल केवल उर्दू के नहीं, बल्कि फारसी के भी शायर थे। मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर मुहम्मद इदरीस ने कहा कि इस संस्था के संस्थापक सर सैयद अहमद खॉ ने भी उर्दू भाषा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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