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हाईकोर्ट का फैसला: जर्जर मकानों पर चलेगा बुलडोजर, अब किरायेदारी का नहीं चलेगा बहाना!

Highcourt News: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि जर्जर भवनों को गिराने में किरायेदार बाधा नहीं बन सकते क्योंकि जनसुरक्षा कानून व्यक्तिगत अधिकारों से ऊपर है।

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प्रयागराज

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Namrata Tiwary

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Namrata Tiwary

Feb 21, 2026

Allahabad Highcourt

Allahabad Highcourt

Highcourt News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर एक मील का पत्थर साबित होने वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई भवन जर्जर और खतरनाक स्थिति में है तो उसे गिराने की प्रक्रिया में वहां रह रहे किरायेदार बाधक नहीं बन सकते। कोर्ट के अनुसार व्यक्तिगत अधिकारों की तुलना में सार्वजनिक हित और जनसुरक्षा कानून सर्वोपरि है।

किरायेदारों को खाली करना होगा भवन

जस्टिस नीरज तिवारी और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने वाराणसी के एक मामले की सुनवाई करते हुए यह बात कही। कोर्ट ने कहा कि अगर नगर निगम ने किसी इमारत को 'खतरनाक' घोषित कर दिया है तो वहां रह रहे लोगों को वह घर खाली करना ही होगा। अक्सर देखा जाता है कि मकान मालिक और किरायेदार के झगड़े या कानूनी मुकदमों की वजह से जर्जर इमारतें नहीं गिर पातीं। इससे बड़ा हादसा होने का डर रहता है। अब ऐसे मुकदमे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में बाधा नहीं बनेंगे।

कानून व्यवस्था के लिए पुलिस बल की तैनाती

कोर्ट ने नगर आयुक्त को कड़े निर्देश दिए हैं कि जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण के दौरान यदि कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका हो, तो पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की जाए। प्रशासन को यह छूट दी गई है कि वे वैधानिक अधिकारों के तहत तुरंत कार्रवाई करें। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि किरायेदारी कानून सुरक्षा जरूर देता है लेकिन जनसुरक्षा के सामने उसकी एक सीमा है।

हादसे के बाद जागा प्रशासन

यह पूरा मामला वाराणसी के इंग्लिशियालाइन स्थित एक पुरानी इमारत से जुड़ा है। वाराणसी नगर निगम ने अगस्त 2021 में ही इस भवन को खतरनाक घोषित कर दिया था। हालांकि कानूनी दांवपेंच के कारण कार्रवाई टलती रही। 29 अगस्त 2025 को भवन का एक हिस्सा गिरने से गंभीर खतरा पैदा हो गया था। इसके बाद मामला कोर्ट पहुंचा।

अब अदालत ने नगर निगम को दो सप्ताह के भीतर ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पूरी करने का अल्टीमेटम दिया है। निवासियों को अपना सामान निकालने के लिए उचित समय दिया जाएगा। लेकिन अगर कोई जानबूझकर रुकावट डालता है तो पुलिस अपनी कार्रवाई कर सकती है।