scriptAllahabad High Court hearing the Gyanvapi Masjid dispute case | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद विवाद मामले की सुनवाई, संपत्ति रजिस्ट्रेशन को लेकर जाने क्या कहा कोर्ट ने | Patrika News

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद विवाद मामले की सुनवाई, संपत्ति रजिस्ट्रेशन को लेकर जाने क्या कहा कोर्ट ने

इस मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति प्रकाश पाड़िया के समक्ष अधिवक्ता ने कहा कि वक्फ एक्ट में संपत्ति का पंजीकरण हो जाने मात्र से गैर मुस्लिम लोगों को उस संपत्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। ऐसी संपत्तियों में गैर मुस्लिम लोगों का संपत्ति से अधिकार खत्म नहीं हो जाता। कहा गया किस कानून में और किस वर्ष में प्रॉपर्टी वक्फ एक्ट मे पंजीकृत हुई, यह प्रतिवादी याची को भी पता नहीं है।

इलाहाबाद

Published: April 13, 2022 11:22:27 am

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट में काशी विशेश्वर नाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद को लेकर सुनवाई अभी पूरी नहीं हो सकी है। मामले में भगवान विश्वनाथ मंदिर की ओर से बहस करते हुए अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने आज कहा कि मंदिर को नुकसान पहुंचाने से संपत्ति का धार्मिक स्वरूप नहीं बदलता है। विवादित विशेश्वर मंदिर का अस्तित्व सतयुग से अब तक चला रहा है। इस मंदिर का ढांचा भी विद्यमान है। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि मंदिर को नुकसान पहुंचाने से उसका धार्मिक स्वरूप नहीं बदलता।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद विवाद मामले की सुनवाई, संपत्ति रजिस्ट्रेशन को लेकर जाने क्या कहा कोर्ट ने
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद विवाद मामले की सुनवाई, संपत्ति रजिस्ट्रेशन को लेकर जाने क्या कहा कोर्ट ने
15वीं सदी से पहले हुआ निर्माण

मामले में सुनवाई के दौरान दलील पेश करते हुए बहस की गई कि मंदिर प्राचीन है और उसका निर्माण 15 वी सदी से पहले का है। इस मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति प्रकाश पाड़िया के समक्ष अधिवक्ता ने कहा कि वक्फ एक्ट में संपत्ति का पंजीकरण हो जाने मात्र से गैर मुस्लिम लोगों को उस संपत्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। ऐसी संपत्तियों में गैर मुस्लिम लोगों का संपत्ति से अधिकार खत्म नहीं हो जाता। कहा गया किस कानून में और किस वर्ष में प्रॉपर्टी वक्फ एक्ट मे पंजीकृत हुई, यह प्रतिवादी याची को भी पता नहीं है।
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28 अप्रैल को होगी इस केस की सुनवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट को यह भी अवगत कराया गया कि 1954 के कानून में वक्फ पंजीकृत हैं। फिर कहा गया कि 1960 के कानून में पंजीकृत हैं। यह भी कह रहे कि 1944 में सरकारी सर्वे के बाद मस्जिद वक्फ बोर्ड में पंजीकृत हैं। यह भी कहा गया कि कोई संपत्ति का हिस्सा वक्फ बोर्ड में पंजीकृत होने से मुस्लिम समाज को कोई अधिकार नहीं मिल जाता। वक्फ बोर्ड केवल मुस्लिम समुदाय के विवाद ही तय कर सकता है। गैर मुस्लिम के बीच विवाद पर वक्फ बोर्ड का कोई अधिकार नहीं है। बहस 28 अप्रैल को होगी।

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