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अतीक की अदालत में मुजरिमों को मिलती थी सजा- ए- मौत, पीड़ित भाई ने सुनाई आपबीती

Atiq Ahmad: अतीक अहमद की अदालत में मुजरिमों को मिलती थी सजा- ए- मौत, पीड़ित परिजनों ने सुनाई आपबीती।

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Atiq Ahmad

Atiq Ahmad

Atiq Ahmad: माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। अतीक अपनी अदालत चलाता था जहां मुजरिमों' को सजा- ए- मौत दी जाती थी। आपको बता दें कि माफिया अतीक और उसके भाई अशरफ की 15 अप्रैल को तीन शूटरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

ये तुम अच्छा नहीं किया'...बार बार कहता रहा अतीक
न्यूज 18 अंग्रेजी की वेबसाइट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में कर्बला पुलिस चौकी इलाके में रहने वाले विजय कुमार साहू अभी तक माफिया ब्रदर्स के जख्मों और दहशत से उबर नहीं पाए हैं, जिन्होंने लगभग 44 सालों तक इलाहाबाद में राज किया था। साहू ने बताया, “कुछ चीजें हैं जो आपको जीवन भर परेशान करती हैं। मुझे अभी भी माफिया अतीक के वो शब्द याद हैं - 'जानत है बे चकिया से हैं' (क्या आप नहीं जानते कि मैं चकिया से हूं), इसके बाद एक और लाइन- 'ये तुम अच्छा नहीं किया' (आपने गलती की)। मैंने मुझे और मेरे भाई को माफ करने के लिए गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन वह कहता रहा - 'ये तुम अच्छा नहीं किया'।

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अशरफ की कार को ओवरटेक की सजा, सजा -ए-मौत
साहू न्यूज 18 को 1996 की उस वकया को बता रहे थे जब इलाहाबाद( अब प्रयागराज) और यूपी के आसपास के जिलों में माफिया ब्रदर्स का आतंक चौथे आसमान पर था। “मुझे वह दिन याद है जब हम सभी चकिया इलाके में एक रिश्तेदार के अंतिम संस्कार में शामिल होने गए थे। जब हम लौट रहे थे, मेरे भाई अशोक कुमार साहू ने एक कार को ओवरटेक किया, बिना यह जाने कि वह गाड़ी अशरफ की है, “साहू ने बताया, नाराज होकर अशरफ ने साहू की कार को सड़क के किनारे एक ढाबे पर रोक लिया और उसके भाई को, जो कार चला रहा था और उसके भाई को इसका खामियाजा भुगतने के लिए धमकी दे कर चला गया। साहू ने कहा, डर को भापते हुए, स्थानीय लोग मामले को शांत करने के लिए आगे आए और हम सभी अपने गंतब्य के लिए निकल पड़े।"

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27 साल बाद परिवार ने तोड़ी चुप्पी
इस घटना के कुछ दिनों के बाद घर पर अतीक ने संदेशा भेजवाया कि वह अपने दरबार में बुला रहा है। जिसे वह अपने दफ्तर में लगाता था। “मैं अपनी माँ के साथ वहाँ गया था। हम कहते रहे कि यह एक गलती थी, हम कभी नहीं जानते थे कि यह अशरफ का गाड़ी है लेकिन उसने कहा 'ये तुम अच्छा नहीं किया', साहुल ने याद किया। कुछ दिनों बाद, 19 जनवरी, 1996 को, साहू का भाई अशोक, 24, प्रयागराज के सिविल लाइंस इलाके के पास अग्रवाल अस्पताल में एक रिश्तेदार को देखने गया, जहाँ उसे अशरफ और उसके गुर्गों ने गोलियों से भूनकर मार ड़ाला, अशोक के भाई ने कहा कि 27 साल तक अतीक के आतंक और रसूख के कारण परिवार चुप रहा, लेकिन हत्या के बाद परिवार ने चुप्पी तोड़ी है।

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