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बीएचयू के पूर्व कुलपति पर गंभीर आरोप ,शिक्षिका ने की उत्पीड़न शिकायत

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष पद पर है तैनात

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प्रयागराज | काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और इलाहाबाद विश्वविद्यालय अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष जीसी त्रिपाठी पर गंभीर आरोप लगे हैं। जिससे एक बार फिर जीसी त्रिपाठी पर कार्यवाही का खतरा मंडरा रहा है। जीसी त्रिपाठी पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक शिक्षिका ने कुलपति रतनलाल हंगलू से शिकायत की है। जिसके बाद से विश्वविद्यालय में हलचल बढ़ गई है। विश्वविद्यालय से जुड़े सूत्रों की मानें तो कुलपति इस हाई प्रोफाइल विवाद को विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की बैठक में उठा सकते हैं।

प्रो जीसी त्रिपाठी पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए शिक्षिका ने बीती सात मई को कुलपति को एक पत्र भेजा जिसमें उन्होंने लिखा है कि अभद्र भाषा में कमेंट करना, झूठे आरोप लगाना बैठकों के दौरान जोक्स कहानी और संस्कृत के श्लोक पढ़ते हुए कमेंट करना। ईमेल भेजकर परेशान करना फोन पर अमर्यादित भाषा में बातचीत सहित कई गंभीर आरोप लगाए है। शिक्षिका द्वारा शिकायत करने का मामला जब लीक हुआ तो विश्वविद्यालय में हड़कंप मच गया ।जानकारी के मुताबिक प्रोफेसर त्रिपाठी के साथ हुई उनकी बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी महिला ने कुलपति को भेजी है।

प्रोफेसर जीसी त्रिपाठी वर्तमान में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष है पूर्व में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति भी रहे है। प्रोफेसर त्रिपाठी पर इस तरह के आरोप लगने के बाद पूरे शहर में चर्चा का विषय है। सभी जानना चाहते हैं कि वह महिला शिक्षिका कौन है और उसने क्या आरोप लगाए हैं। विश्वविद्यालय के कर्मचारी की मानें तो कुलपति हांग्लू कार्यपरिषद की बैठक में बड़ा निर्णय ले सकते हैं।

बता दें कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय इससे पहले भी इस तरह का मामला चलता रहा है। हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सूर्य नारायण की एक महिला ने शिकायत की थी शिकायत के बाद कुलपति ने कार्य परिषद के निर्णय के आधार पर सूर्य नारायण सिंह को निलंबित कर दिया था। कैंपस में इस बात को लेकर भी चर्चा है कि प्रोफेसर त्रिपाठी के खिलाफ भी कुलपति बड़ा निर्णय ले सकते हैं ।लेकिन बीते दिनों कुलपति रतनलाल हांग्लू पर खुद भी इस तरह के आरोप लगे हैं जिन्हें कुलपति नकार चुके हैं। अब देखना है कि कुलपति इस तरह के आरोप पर क्या निर्णय लेते हैं। इन सभी आरोपों को देखते हुए पत्रिका ने कई बार त्रिपाठी से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनका फोन संपर्क से बाहर रहा।