Allahabad News:मोती लाल नेहरू अस्पताल में पिछले 1 साल में लगभग जैंडर डिस्फोरिया के 10 मामले आ चुके है। इनका तनाव कम करने के लिए कभी कभी एंटी डिप्रेशन की दवाएं भी दी जाती है। ऐसी लड़कियां अपना जेंडर परिवर्तन कराने की जिद भी करती हैं। उन्हें दूसरी लड़कियों से दोस्ती करना या उनके साथ रहना पसंद नही होता है। जिसकी वज़ह से इन लड़कियों के घर का माहौल खराब रहता है।
इलाहाबाद के मोतीलाल नेहरू अस्पताल में इन दिनों इस तरह के मामले आए हैं जिसमे लड़किया खुद को लड़की नही लड़का बोलती है। यही नहीं वो खुद को लड़का कहलवाना चाहती हैं। साथ ही लड़को जैसा बन कर रहना भी चाहती हैं। इन लड़कियों के घरवाले इनकी इस आदत से परेशान होकर इनका इलाज करवाने के लिए ला रहें हैं। मनोचिकित्सकों की माने तो यह एक मानसिक रोग है। जिसका नाम जैंडर डिस्फोरिया है। इस तरह के मरीजों की काउंसलिंग की जाती है। जिसमे उनको यकीन दिलाया जाता है की वो लड़का नहीं लड़की हैं।
मोती लाल नेहरू अस्पताल में पिछले 1 साल में लगभग जैंडर डिस्फोरिया के 10 मामले आ चुके है। इनका तनाव कम करने के लिए कभी कभी एंटी डिप्रेशन की दवाएं भी दी जाती है। ऐसी लड़कियां अपना जेंडर परिवर्तन कराने की जिद भी करती हैं। उन्हें दूसरी लड़कियों से दोस्ती करना या उनके साथ रहना पसंद नही होता है। जिसकी वज़ह से इन लड़कियों के घर का माहौल खराब रहता है।
डॉक्टरों के माने तो यह एक मनोरोग है। जिसकी वजह से उन लड़कियों की जिद तात्कालिक होती है। इस में जितनी जल्दी काउंसलिंग होगी उतना जल्दी रोगी को आराम मिल सकता है।
गांव का मामला
इंटर की छात्रा बचपन से ही लड़को की तरह अपना व्यवहार करती थी। कुछ समय बाद अचानक उसकी मां ने उसका मोबाइल में चैट देखा तो उसके7 होश उड़ गए,जिसमे वो लड़का बन कर लड़कियों से बातें करती रहती थी। उसकी मां उसे लेकर कालविन अस्पताल आई जहां पे मनोचिकित्सक ने उसकी काउंसलिंग करके पता चला की लड़की जैंडर डिस्फोरिया नामक बीमारी से ग्रसित है।