
कोर्ट ने गलती को सुधारने की अनुमति की मांग में दाखिल याचिका खारिज कर दी है
इलाहाबाद. हाईकोर्ट ने 69 हजार अध्यापकों की भर्ती में ऑनलाइन फार्म भरने में हुई गलती को मानवीय भूल व कम्प्यूटर आपरेटर की गलती मानने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने गलती को सुधारने की अनुमति की मांग में दाखिल याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि यदि ऐसी गलतियों को सुधारने की अनुमति दी गयी तो इसका दुरुपयोग किया जायेगा। अभ्यर्थी गलती का लाभ उठायेंगे और पकड़े जाने पर मानवीय भूल कहकर गलती से पल्ला झाड़ लेंगे। कोर्ट ने कहा कि जिसने गलती की है उसे उसके परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने आशुतोष कुमार श्रीवास्तव व 60 अन्य की याचिका पर दिया है।
याची अधिवक्ता सीमान्त सिंह का कहना था कि याचियों ने ऑनलाइन फार्म भरने में बीएड के पूर्णांक प्राप्तांक भरने में गलती की है। याची भर्ती परीक्षा में सफल घोषित हुए हैं। कम्प्यूटर आपरेटरों की गलती मानवीय भूल है जिसे दुरुस्त करने की अनुमति दी जाय। गलतियां शैक्षिक प्रमाणपत्रो मे प्राप्त अंकों से संबंधी है। राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता एम सी चतुर्वेदी ने इसका विरोध किया और कहा कि यह घोर लापरवाही है। सुधारने की छूट दुरूपयोग को बढ़ावा दे सकती है। कोर्ट ने कहा कि गलती मानवीय भूल नही है। फार्म भरते समय निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। कोर्ट ने इस मांग को भी यह कहते हुए खारिज कर दिया कि याचियो के परीक्षा नियामक प्राधिकारी को दिये गये प्रत्यावेदन को निर्णीत करने का निर्देश दिया जाये। कोर्ट ने कहा कि बहस के लिए एक और विन्डो नही खोली जा सकती। कोर्ट ने याचिका पर कोई राहत देने से इंकार कर दिया है।
Published on:
04 Jun 2020 06:23 pm

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