
सैटेलाइट अस्पताल की लैब में गड़बड़ी उजागर, बिना सैंपल लिए जारी हुई यूपीटी पॉजिटिव रिपोर्ट
पीपीपी मोड पर संचालित है लैब, व्यवस्थाओं पर उठ रहे गंभीर सवाल
शहर के सैटेलाइट अस्पताल में जांच व्यवस्था की गंभीर खामियां सामने आई हैं, यहां खांसी के इलाज के लिए आई एक अविवाहित युवती को जांच रिपोर्ट में गर्भवती बता दिया गया। हैरानी की बात यह है कि युवती का प्रेग्नेंसी टेस्ट (यूपीटी) के लिए सैंपल लिया ही नहीं गया था, फिर भी रिपोर्ट पॉजिटिव जारी कर दी गई। इस चूक से युवती सदमे में आ गई और अस्पताल परिसर में ही रोने लगी।
जानकारी के अनुसार शहर निवासी युवती पिछले करीब 20 दिनों से खांसी से परेशान थी। 1 अप्रैल को वह सैटेलाइट अस्पताल पहुंची, जहां चिकित्सक ने एक्स-रे, सीबीसी, सीआरपी और ईएसआर जांच लिखी। रिपोर्ट आने के बाद जब युवती अपनी मां के साथ चिकित्सक के पास पहुंची, तो चिकित्सक ने उससे शादी के बारे में पूछा। युवती के इनकार करने पर चिकित्सक ने यूपीटी रिपोर्ट पॉजिटिव होने की जानकारी दी। मामले की जांच में सामने आया कि चिकित्सक ने यूपीटी जांच लिखी ही नहीं थी। लैब स्तर पर किसी अन्य मरीज की रिपोर्ट गलती से युवती के नाम दर्ज कर दी गई, जिससे यह गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई।
सरकारी और निजी जांच में भारी अंतर
इसी तरह 1 अप्रैल को एक अन्य गर्भवती महिला के मामले में भी अस्पताल की जांच पर सवाल खड़े हुए। चिकित्सक की ओर से बच्चे की ग्रोथ जांच के लिए बीटा एचसीजी टेस्ट लिखे जाने पर अस्पताल की लैब में ऑब्जर्व्ड वैल्यू 0.05 आई। संदेह होने पर निजी लैब में दोबारा जांच कराई गई, जहां यह वैल्यू 555.37 पाई गई। दोनों रिपोर्टों में भारी अंतर ने लैब की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
पीपीपी मोड के बाद बढ़ीं अव्यवस्थाएं
राज्य सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों को छोड़कर अन्य अस्पतालों की लैब सेवाएं पीपीपी मोड पर सौंप दी हैं। इसी क्रम में सैटेलाइट अस्पताल में 18 फरवरी से कृष्णा डायग्नोस्टिक्स लिमिटेड द्वारा मदर लैब का संचालन शुरू किया गया, जिसमें जांचों की संख्या बढ़ाकर 151 कर दी गई। लेकिन संचालन शुरू होने के बाद से लगातार गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि लैब में अप्रशिक्षित और गैर-पंजीकृत कर्मियों तथा स्टूडेंट्स से काम लिया जा रहा है, जिससे जांच की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। लगातार सामने आ रही इन त्रुटियों ने न केवल मरीजों की सुरक्षा बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर क्या कार्रवाई करता है।
मामले में अभी कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। फिर भी जांच कराई जाएगी। इसमें गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।-डॉ. प्रमिला मीणा, पीएमओ, सैटेलाइट अस्पताल, काला कुआं।
-डॉ. प्रमिला मीणा, पीएमओ, सैटेलाइट अस्पताल काला कुआं।
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अस्पताल प्रशासन की ओर से इस संबंध में अवगत नहीं कराया गया है। जांच में बाद गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. योगेन्द्र शर्मा, सीएमएचओ, अलवर।
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ऐसा कोई इश्यू हमारे पास नहीं आया है। अगर किसी को कोई समस्या थी, तो हमारे पास लेकर आता, हम मरीज की समस्या का समाधान करते।
-पंकज, मैनेजर, कृष्णा डायग्नोस्टिक्स लिमिटेड।
Published on:
04 Apr 2026 06:35 pm
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