अलवर. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शुक्रवार को एक दिवसीय दौरे पर अलवर एवं टपूकड़ा आएंगे। वे सुबह 11 बजे अलवर आएंगे तथा मिनी सचिवालय का लोकार्पण कर यहां चल रहे महंगाई राहत शिविर का अवलोकन करेंगे। यहीं से नटनी का बारा से बारा भड़कोल सड़क निर्माण का वर्चुअल शिलान्यास कर सरस डेयरी के पीछे मैदान में जनसभा को सम्बोधित करेंगे।
अलवर. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शुक्रवार को एक दिवसीय दौरे पर अलवर एवं टपूकड़ा आएंगे। वे सुबह 11 बजे अलवर आएंगे तथा मिनी सचिवालय का लोकार्पण कर यहां चल रहे महंगाई राहत शिविर का अवलोकन करेंगे। यहीं से नटनी का बारा से बारा भड़कोल सड़क निर्माण का वर्चुअल शिलान्यास कर सरस डेयरी के पीछे मैदान में जनसभा को सम्बोधित करेंगे। मुख्यमंत्री दोपहर 12 बजे अलवर से हेलीकॉप्टर से टपूकड़ा के लिए प्रस्थान करेंगे और साढ़े 12 बजे टपूकड़ा पहुंचकर महंगाई राहत शिविर का अवलोकन करेंगे। बाद में वे स्कूल मैदान में जनसभा को सम्बोधित करेंगे। मुख्यमंत्री दोपहर 2.30 बजे टपूकड़ा से हेलीकॉप्टर से ग्राम पंचायत मुरलीपुरा तहसील शाहपुरा के लिए प्रस्थान करेंगे।
मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर प्रशासन, पुलिस के अधिकारी गुरुवार को अलवर व टपूकड़ा में तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे रहे। अधिकारियों ने हैलीपेड, शिविर स्थल एवं सभा स्थल पर चल रही तैयारियों का जायजा लिया। वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष योगेश मिश्रा समेत अन्य नेताओं ने भी मुख्यमंत्री की तैयारियों को जायजा लिया।
मुख्यमंत्री के दौरे के राजनीतिक मायने भी
मुख्यमंत्री गहलोत के अलवर व टपूकड़ा दौरे के राजनीतिक मायने भी हैं। विधानसभा चुनाव में मात्र छह महीने का समय बचा है। चुनाव से पहले जिले में कांग्रेस व राज्य सरकार की नब्ज टटोलना जरूरी था। वे कुछ महीने पहले अलवर आए जरूर, लेकिन भारत जोड़ो यात्रा एवं एक निजी कार्यक्रम में ही व्यस्त रहे। अब महंगाई राहत शिविरों का अवलोकन कर राज्य सरकार की ओर से लोगों को दी गई छूट तथा नए जिलों की घोषणा का भी फीडबैक लेना था, इसलिए अलवर व टपूकड़ा में महंगाई राहत शिविर का अवलोकन, नई सौगात देने व जनसभा का कार्यक्रम तय किया गया।
पांच लाख आबादी की प्यास बुझाने को सिलीसेढ़ योजना जरूरी
अलवर जिले में पानी की समस्या बड़ी है और आगामी विधानसभा चुनाव में पेयजल संकट राजनीतिक दलों के लिए बड़ा मुददा बनना तय है। अलवर शहर की करीब पांच लाख आबादी के पेयजल संकट की आस सिलीसेढ़ शहरी जल योजना पर टिकी है। इस योजना पर विभिन्न विभागों के उच्च स्तर पर सहमति बन चुकी है, लेकिन राज्य सरकार की अभी मंजूरी नहीं मिल सकी है।
सिलीसेढ़ बांध से अलवर की दूरी मात्र 10 किलोमीटर है और वहां से पानी लाने पर मात्र 38 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। जबकि ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट, ईशरदा बांध योजना बड़े बजट की है और इनमें काफी दूरी से पानी लाना होगा। वहीं ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट पर राजनीति भारी होने से फिलहाल इसे धरातल पर लाना भी आसान नहीं है। लेकिन सिलीसेढ़ कम दूरी और छोटे बजट की योजना है, जिसे धरातल लाना भी आसान है। जल संसाधन, जलदाय विभाग के उच्च अधिकारियों एवं प्रशासन की ओर से इस योजना को मूर्तरूप देने पर सहमति है। केवल राज्य सरकार की ओर से इसे मंजूरी दिए जाने की दरकार है।
सरकारी जमीन के बंदरबाट पर नहीं हुई कार्रवाई
अलवर जिले के राजगढ़ उपखंड के टहला तहसील क्षेत्र में पिछले दिनों प्रशासन गांवों के संग अभियान में करोड़ों रुपए कीमत की सरकारी जमीन जरूरतमंदों को आवंटन के नाम पर बंदरबाट की गई। इसमें प्रशासनिक, राजनीतिक मिलभगत के चलते नदी नाले, राडा, वन, खनन क्षेत्रों की प्रतिबंधित सरकारी जमीन का बाहरी लोगों को नियम विरुद्ध तरीके से आवंटन कर राज्य सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया गया। प्रतिबंधित सरकारी जमीन की बंदरबाट की शिकायत होने पर जिला प्रशासन ने कमेटी गठित कर मामले की जांच कराई, इसमें 803 सरकारी जमीन आवंटन के प्रकरण गलत पाए गए। बाद में कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर जिला कलक्टर न्यायालय ने सभी 803 सरकारी जमीन आवंटन प्रकरण निरस्त कर दिए। इतना नहीं जिला प्रशासन ने सरकारी जमीन के नियम विरुद्ध आवंटन की रिपोर्ट कई महीने मुख्यमंत्री कार्यालय, कार्मिक विभाग, एसओजी, एसीबी समेत कई विभागों को भेज दी गई। राज्य सरकार के वरिष्ठ आइएएस अधिकारी इस मामले की जांच करने मौके तक पहुंचे, एसओजी ने जांच शुरू की, लेकिन दोषी अधिकारी के खिलाफ अब तक कार्रवाई नहीं हो पाई। एसीबी को अभी जांच की मंजूरी नहीं मिल सकी, वहीं मुख्यमंत्री कार्यालय से भी कार्रवाई का इंतजार है।
साढ़े चार साल में अलवर व भिवाड़ी यूआईटी को नहीं मिले चेयरमैन
राज्य सरकार का लगभग साढ़े चार साल का कार्यकाल बीत चुका है। लेकिन अलवर एवं भिवाड़ी यूआईटी को अब तक पब्लिक चेयरमैन नहीं मिल सका। अब विधानसभा चुनाव में मात्र छह महीने का समय बचा है और अक्टूबर की शुरुआत में चुनाव की आचार संहिता लगने की उम्मीद है। ऐसे में राज्य सरकार के पास यूआईटी चेयरमैन नियुक्त करने के लिए मात्र तीन माह का समय बचा है। इस समय में यदि सरकार नियुक्ति भी करती है तो शहर के विकास के लिए नवनियुक्त चेयरमैन को तीन महीने ही मिल पाएंगे जो कि किसी भी दृष्टि से पर्याप्त नहीं कहे जा सकते। पिछले साढ़े चार साल से दोनों ही यूआईटी चेयरमैन कलक्टर के भरोसे ही हैं।
स्मार्ट सिटी की घोषणा नहीं ले सकी मूर्तरूप
राज्य सरकार की ओर से अलवर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की घोषणा को एक साल से ज्यादा समय बीत गया, लेकिन यह योजना अभी तक धरातल पर नहीं आ सकी। अलवर यूआईटी की ओर से स्मार्ट सिटी का प्रोजेक्ट बनाकर राज्य सरकार को भेजा जा चुका है, लेकिन अभी तक सरकार ने इस योजना के लिए बजट जारी नहीं किया है। वहीं गत बजट में अलवर में नगर परिषद को नगर निगम को दर्जा देने की घोषणा की गई, लेकिन इसका भी अभी तक नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ, जिससे नगर निगम के लाभ से अलवरवासी वंचित हैं।