23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आधुनिक तकनीक से खेती बनी मुनाफे का सौदा, गुजुकी के किसान महेन्द्र सैनी की लाखों की कमाई

अलवर शहर के निकट गुजुकी गांव के किसान महेन्द्र सैनी ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि खेती को नए नजरिए, नवाचार और आधुनिक तकनीक के साथ किया जाए, तो यह भी एक सफल और लाभकारी उद्योग बन सकती है।

2 min read
Google source verification

किसान महेन्द्र (फोटो - पत्रिका)

अलवर शहर के निकट गुजुकी गांव के किसान महेन्द्र सैनी ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि खेती को नए नजरिए, नवाचार और आधुनिक तकनीक के साथ किया जाए, तो यह भी एक सफल और लाभकारी उद्योग बन सकती है। महेंद्र ने पारंपरिक खेती को आधुनिक स्वरूप देते हुए दो पॉली हाउस, एक सेननेट, सौर ऊर्जा संयंत्र, फार्म पौंड और बायोगैस प्लांट स्थापित कर रखा है। इसी नवाचार की बदौलत महेन्द्र सैनी हर साल लाखों रुपए की आमदनी कर रहे हैं और 8 से 10 परिवारों की आजीविका भी चला रहे हैं।

बड़े भाई को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान

पॉली हाउस और सेननेट लगाने में करीब 25 लाख रुपए का खर्च आया, जिसमें कृषि विभाग से अनुदान भी मिला। पॉली हाउस में खीरा, शिमला मिर्च और टमाटर की खेती की जाती है। वे कार्बनिक खेती और पशुपालन भी कर रहे हैं। उनके पास 10 गाय हैं, जिनसे निकलने वाले गोबर का उपयोग बायो गैस संयंत्र में किया जाता है। इस बायो गैस से रोजाना 30 से 50 लोगों का भोजन तैयार हो जाता है। करीब 8 बीघा जमीन पर बूंद-बूंद करके सिंचाई पद्धति अपनाई हुई है, जिससे पानी की बचत होती है। महेन्द्र सैनी के बड़े भाई को कृषि नवाचार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल चुका है।

160 टन खीरा, भाव 15 से 20 रुपए किलो भाव

प्रत्येक सीजन में दोनों पॉली हाउस से करीब 160 टन खीरा पैदा होता है। बाजार में खीरे के भाव 15 से 20 रुपए प्रति किलो तक मिलते हैं। सभी खर्च काटने के बाद दोनों पॉली हाउस से सालभर में करीब 25 लाख रुपए की आमदनी हो जाती है। एक एकड़ से लगभग 13 लाख रुपए का खीरा उत्पादन होता है। वहीं, खेती में कीटनाशक की दवाइयां देसी तरीके से तैयार की जाती हैं। गायों के गोबर से जीवामृत पानी तैयार किया जाता है, जिसे खेती में उपयोग लिया जाता है।

अब स्ट्रॉबेरी की भी शुरुआत

नवाचार करते हुए किसान महेन्द्र सैनी ने आधा बीघा जमीन में स्ट्रॉबेरी भी लगाई है। स्ट्रॉबेरी के पौधे हिमाचल से मंगवाए गए हैं। आधा बीघा में करीब 3000 पौधे लगाए गए हैं, जिनकी कीमत 4 रुपए प्रति पौधा है। यह सर्दी की उपज है और इससे भी अच्छी आमदनी होने की उम्मीद है। साथ ही 10 से 15 ड्रेगन फ्रूट के पौधे लगाए हैं।

महेन्द्र ने बताया कि उनके इस मॉडल से परिवार के साथ-साथ 2 से 5 लोगों को सीजनभर रोजगार मिलता है। फसल तोड़ने जैसे कार्यों के लिए मजदूरों की जरूरत रहती है, जिससे आसपास के कई परिवारों को रोजगार मिल रहा है। फार्म पौंड भी लगाया हुआ है, जिसमें बारिश का पानी संचय होता है, जिसका उपयोग उपज में किया जाता है।