अलवर. जिले में विभिन्न स्थानों पर नियम विरुद्ध चल रही खानों की हकीकत अब खुल सकेगी। ज़िला-स्तरीय पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण की ओर से जारी पर्यावरणीय अनुमतियों का अब राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण जांच करेगा।
अलवर. जिले में विभिन्न स्थानों पर नियम विरुद्ध चल रही खानों की हकीकत अब खुल सकेगी। ज़िला-स्तरीय पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण की ओर से जारी पर्यावरणीय अनुमतियों का अब राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण जांच करेगा। खनन विभाग ने जिले में सभी खनन पटटाधारियों को नोटिस जारी कर आदेशों की पालना को कहा है।
राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण एनजीटी नई दिल्ली की ओर से एक प्रकरण में निर्देश दिए कि ज़िला-स्तरीय पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण की ओर से जारी सभी पर्यावरण अनुमतियों का राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण की ओर से पुन: परीक्षण किया जाना है। इस सम्बन्ध में भारत सरकार के वन, पर्यावरण जलवायु मंत्रालय की ओर से 12 महीने की अवधि में पर्यावरण अनुमतियों का पुन: परीक्षण कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए थे। इस पर खनिज निदेशालय ने सभी खनन पट्टाधारियों को नोटिस दिए हैं। अलवर जिले में खनि अभियंता ने भी इस आशय के निर्देश जारी किए हैं।
पूर्व में एनजीटी तक पहुंच चुकी शिकायतें
अलवर जिले में नदी, नालों, तालाब, बांध एवं अन्य प्रतिबंधित भूमि के पास नियम को दरकिरनार कर खनन पट्टे आवंटित करने एवं उनकी पर्यावरणीय स्वीकृति जारी करने की शिकायतें खान निदेशालय से लेकर एनजीटी तक पहुंच चुकी हैं। एनजीटी की ओर से पूर्व में भी खनन पट्टाें के आवंटन में गड़बड़ी व पर्यावरणीय स्वीकृति में अनियमितता को लेकर निर्देश दिए जाते रहे हैं। इसके बाद भी जिले में अनेक स्थानों पर प्रतिबंधित भूमि के आसपास बड़े पैमाने पर नियम विरुद्ध तरीके से खनन कार्य जारी है।
जांच होने पर उजागर होगी हकीकत
एनजीटी के आदेश पर जिले में सभी खनन पट्टों की जांच होने पर नियम विरुद्ध चल रही खानों की हकीकत सामने आएगी। लंबे समय से जांच नहीं हो पाने से जिले के टहला क्षेत्र िस्थत मार्बल जोन में कई खानें नियम विरुद्ध प्रतिबंधित भूमि के पास संचालित हो रही हैं।
कार्रवाई की चेतावनी
खनि अभियंता अलवर राजेन्द्र सिंह ने सभी खनन पटटा धारियों को नाेटिस माध्यम से सूचना भेजकर इन आदेशों की पालना नहीं होने पर नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी है।