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31 मई तक और होगी समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद

समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए किसानों के पास अब गिनती के दिन ही बचे हैं। 31 मई को खरीद प्रक्रिया समाप्त होनी है, लेकिन जिले के अनेक किसान अब तक अपनी उपज बेचने के लिए नंबर आने का इंतजार कर रहे हैं।
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अलवर

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jitendra kumar

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Updated: 23 May 2026, 6:16 PM IST

समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए किसानों के पास अब गिनती के दिन ही बचे हैं। 31 मई को खरीद प्रक्रिया समाप्त होनी है, लेकिन जिले के अनेक किसान अब तक अपनी उपज बेचने के लिए नंबर आने का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर भारतीय खाद्य निगम यानी एफसीआई ने खरीद केंद्र बंद करने की तैयारी भी शुरू कर दी है।

समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए किसानों के पास अब गिनती के दिन ही बचे हैं। 31 मई को खरीद प्रक्रिया समाप्त होनी है, लेकिन जिले के अनेक किसान अब तक अपनी उपज बेचने के लिए नंबर आने का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर भारतीय खाद्य निगम यानी एफसीआई ने खरीद केंद्र बंद करने की तैयारी भी शुरू कर दी है। ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि इस बार ऑनलाइन स्लॉट प्रणाली और धीमी खरीद प्रक्रिया ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई किसानों को समय पर स्लॉट नहीं मिल पाया, जबकि जिन किसानों को तारीख मिली, वे किसी कारणवश केंद्र पर नहीं पहुंच सके तो उन्हें दोबारा मौका नहीं दिया गया। इससे किसानों में नाराजगी है और वे खरीद अवधि बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

छह जिलों में खरीद लक्ष्य से काफी पीछे

एफसीआई की ओर से अलवर, खैरथल-तिजारा, डीग, भरतपुर, करौली और धौलपुर जिलों में बनाए गए 33 खरीद केंद्रों पर अब तक 73 हजार 682 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है। यह खरीद पिछले साल की तुलना में काफी कम मानी जा रही है। वहीं, अलवर जिले में इस बार एक लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक जिले के केवल आठ केंद्रों पर 18 हजार 216 मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद हो सकी है। इसमें अकेले अलवर शहर केंद्र पर 5472 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया।“एक बीघा नियम” बना किसानों की परेशानीइस बार विभाग ने समर्थन मूल्य खरीद को ऑनलाइन पोर्टल से जोड़ते हुए किसानों की भूमि रिकॉर्ड के आधार पर खरीद सीमा तय कर दी। एक बीघा जमीन पर अधिकतम करीब 10 क्विंटल गेहूं बेचने की अनुमति दी गई है। पहले कई वर्षों तक किसान बिना जमीन रिकॉर्ड की सीमा के भी एफसीआई केंद्रों पर गेहूं बेचते रहे, लेकिन इस बार लागू व्यवस्था से बड़े किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि वास्तविक उत्पादन अधिक होने के बावजूद वे पूरी उपज समर्थन मूल्य पर नहीं बेच पा रहे।

अंतिम दिनों में बढ़ी किसानों की बेचैनी

खरीद समाप्ति की तारीख नजदीक आते ही खरीद केंद्रों पर किसानों की आवाजाही बढ़ गई है। कई किसान बार-बार पोर्टल और केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। किसानों को डर है कि यदि समय पर नंबर नहीं आया तो उन्हें खुले बाजार में कम दाम पर गेहूं बेचना पड़ेगा।