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गर्मी का टॉर्चर: 434 नलकूप नहीं बुझा रहे शहर की प्यास

भीषण गर्मी के बीच अलवर शहर में पानी का संकट गहरा रहा है। शहर में प्रतिदिन पानी की मांग करीब 95 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) है, जबकि वर्तमान में केवल 49 एमएलडी पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है। जलदाय विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शहर में कुल 434 नलकूप सक्रिय हैं। इनमें से 94 पुराने बोरिंगों को गहरा किया गया, जिनमें अधिकतर में दोबारा पानी निकल आया है। शहर को स्थायी राहत देने के लिए सिलीसेढ़ क्षेत्र से 35 बोरिंगों के जरिए पानी लाने की बड़ी योजना तैयार की गई थी, लेकिन यह योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई। योजना अटकने से शहर को अतिरिक्त जल स्रोत नहीं मिल सका और संकट लगातार गहराता जा रहा है।

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अलवर

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jitendra kumar

May 23, 2026

भीषण गर्मी के बीच अलवर शहर में पानी का संकट गहरा रहा है। शहर में प्रतिदिन पानी की मांग करीब 95 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) है, जबकि वर्तमान में केवल 49 एमएलडी पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है। जलदाय विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शहर में कुल 434 नलकूप सक्रिय हैं। इनमें से 94 पुराने बोरिंगों को गहरा किया गया, जिनमें अधिकतर में दोबारा पानी निकल आया है। कई क्षेत्रों में टैंकरों और सीमित सप्लाई के सहारे काम चलाना पड़ रहा है।

भीषण गर्मी के बीच अलवर शहर में पानी का संकट गहरा रहा है। जलदाय विभाग की पूरी व्यवस्था फिलहाल नलकूपों के भरोसे है, लेकिन बढ़ती आबादी और गिरते भूजल स्तर ने हालात मुश्किल कर दिए हैं। शहर में प्रतिदिन पानी की मांग करीब 95 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) है, जबकि वर्तमान में केवल 49 एमएलडी पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है। ऐसे में कई कॉलोनियों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा। जलदाय विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शहर में कुल 434 नलकूप सक्रिय हैं। इनमें से 94 पुराने बोरिंगों को गहरा किया गया, जिनमें अधिकतर में दोबारा पानी निकल आया है। इससे कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन गर्मी बढ़ने के साथ पानी की खपत तेजी से बढ़ रही है। कई क्षेत्रों में टैंकरों और सीमित सप्लाई के सहारे काम चलाना पड़ रहा है।

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सिलीसेढ़ योजना फाइलों में अटकी
शहर को स्थायी राहत देने के लिए सिलीसेढ़ क्षेत्र से 35 बोरिंगों के जरिए पानी लाने की बड़ी योजना तैयार की गई थी, लेकिन यह योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई। योजना अटकने से शहर को अतिरिक्त जल स्रोत नहीं मिल सका और संकट लगातार गहराता जा रहा है।
नए बोरिंग से राहत की उम्मीद
वन राज्यमंत्री संजय शर्मा की ओर से 31 नए बोरिंगों की मंजूरी दी गई है। इनमें से करीब 15 बोरिंग पानी की ज्यादा किल्लत वाले इलाकों में किए जा चुके हैं। बजट घोषणा 2026-27 के तहत 50 नए बोरिंगों का कार्य भी जारी है। विभाग को उम्मीद है कि इन योजनाओं के पूरा होने के बाद शहर को कुछ राहत मिल सकेगी।
अमृत योजना अब तक शुरू नहीं
शहर में पेयजल व्यवस्था सुधारने के लिए अमृत योजना की शुरुआत अब तक नहीं हो सकी है। हालांकि विभाग की ओर से प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं, लेकिन मंजूरी और काम शुरू होने का इंतजार बना हुआ है। यदि यह योजना शुरू होती है, तो पाइपलाइन नेटवर्क और जल वितरण व्यवस्था में बड़ा सुधार संभव माना जा रहा है।