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इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस को मिली मंजूरी, सेटेलाइट से होगी निगरानी

आम बजट 2026-27 में अलवर जिले के लिए कोई विशेष विकासात्मक घोषणा भले ही नहीं हो सकी हो, लेकिन वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक अहम पहल को हरी झंडी मिल गई है।

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आम बजट 2026-27 में अलवर जिले के लिए कोई विशेष विकासात्मक घोषणा भले ही नहीं हो सकी हो, लेकिन वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक अहम पहल को हरी झंडी मिल गई है। बजट में इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस की स्थापना को मंजूरी दी गई है, जिसका सीधा लाभ राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व सहित रणथंभौर और मुकुंदरा टाइगर रिजर्व को मिलेगा। इसके साथ ही देशभर के अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों में टाइगर, लेपर्ड, लॉयन जैसी बड़ी वन्य प्रजातियों के संरक्षण को मजबूती मिलेगी।

आधुनिक तकनीकों का उपयोग

इस गठबंधन के तहत वन्यजीवों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। विदेशी सहयोग से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेटेलाइट मॉनिटरिंग और वैज्ञानिक डेटा साझा करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे न केवल वन्यजीवों पर नजर रखी जा सकेगी, बल्कि अवैध शिकार पर भी प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

सरिस्का के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक आरएस शेखावत का कहना है कि अफ्रीका के बाद भारत के पास सबसे अधिक बाघ और तेंदुए हैं। ऐसे में यह अलायंस अभयारण्यों को तकनीकी, वित्तीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्रदान कर संरक्षण प्रयासों को नई दिशा देगा। इससे लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण और उनकी संख्या में बढ़ोतरी की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव लंबे समय से इस अलायंस की वकालत कर रहे थे, जिसे अब बजट में औपचारिक मंजूरी मिल गई है।

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