अलवर में चल रहा है 75 दिवसीय अलवर रंगम थियेटर फेस्टिवल अलवर. रंग संस्कार थियेटर ग्रुप की ओर से आयोजित 75 दिवसीय अलवररंगम थियेटर फेस्टिवल की 63 वीं संध्या पर मोहिनी नित्य सुंदरा फाउंडेशन दिल्ली की नीरज नीर का लिखित एवं मोहिनी सुंदर का निर्देशित नाटक ढुकनी का मंचन किया गया।
ढुकनी नाटक झारखंड की एक ऐसी परंपरा की कथा बयां करता है जिस परंपरा के तहत स्त्री - पुरुष बिना विवाह किए साथ रहते हैं। समाज इस व्यवस्था को स्वीकार नहीं करता है और उसे हेय दृष्टि से देखता है। इस तरह लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाली औरत को 'ढुकनी' शब्द के विशेषण से संबोधित किया जाता है।
नाटक के कथानक के अनुसार कहानी के दो मुख्य पात्र हैं, पार्वती और बिरजू। दोनों साथ - साथ मजदूरी करते हैं और एक दूसरे से प्यार करते हैं। ये दोनों शादी करके साथ रहना चाहते हैं। वे अपने विवाह का प्रस्ताव लेकर पंचायत के पास जाते हैं। पंचायत शादी के लिए उनके समक्ष शर्त रखती है कि वे यदि पूरे गांव को भरपेट खाला खिलाएं तो उनके विवाह को स्वीकृति मिल सकती है। पार्वती और बिरजू मजदूर हैं और मुश्किल से दो वक्त की रोटी का ही जुगाड कर पाते हैं। वे पंचायत की शर्त को पूरा नहीं करते, फलस्वरूप वे बिना विवाह किए ही साथ रहने लगते हैं। अब गांव के पुरुष पार्वती को गंदी निगाह से देखने लगते हैं और उसे ढुकनी की अपमानजनक संज्ञा से संबोधित करते हैं।
75 दिवसीय नाटय महोत्सव में एक ही मंच पर देशभर से आए रंगमंच के कलाकारों को अपनी प्रतिभा दि खाने का मौका मिल रहा है। अलवर में होे रहा यह नाटय महोत्सव विश्व रिकार्ड बनाने के लिए किया जा रहा है। संस्था के निदेशक देशराज मीणा ने अलवर के रंगमंच के कलाकारों को ही नहीं बल्कि दुसरे राज्य के कलाकारों को भी आगे बढ़ने का मौका दिया है। इस महोत्सव में शायद ही कोई ऐसा विषय हो जिसको नाटक की मदद से दिखाया ना हो। जो एक बार यहां आता है वह बार बार नाटक देखना चाहता है।