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मंदिर की जमीन पर भू-माफियाओं की नजर! भड़के ग्रामीण, एसडीएम ऑफिस पहुंचे

अलवर के राजगढ़ कस्बे में स्थित एक पुराने मंदिर की जमीन को बचाने के लिए अब स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए हैं।

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जुलूस निकालकर एसडीएम सीमा मीना को ज्ञापन सौंपा (फोटो - पत्रिका)

अलवर के राजगढ़ कस्बे में स्थित एक पुराने मंदिर की जमीन को बचाने के लिए अब स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए हैं। ख्वास जी के बाग स्थित रामरघुनाथ महाराज मंदिर की भूमि को भू-माफियाओं द्वारा खुर्द-बुर्द करने और वहां प्लाटिंग करने के प्रयासों के विरोध में जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। मंगलवार को पूर्व पार्षद धर्मचंद सैनी के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुषों ने जुलूस निकाला और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

'श्री रामरघुनाथ महाराज संघर्ष समिति' का हल्ला बोल

विरोध प्रदर्शन 'श्री रामरघुनाथ महाराज संघर्ष समिति' के बैनर तले आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी करते हुए रैली के रूप में उपखंड कार्यालय पहुंचे। रैली के दौरान पूरे रास्ते प्रशासन की ढुलमुल कार्यशैली के खिलाफ नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भू-माफिया मंदिर की पवित्र जमीन पर कब्जा कर उसे व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल करने की फिराक में हैं।

भू-माफियाओं पर गंभीर आरोप

संघर्ष समिति से जुड़े धर्मचंद सैनी, भगवान सैनी और दुर्गा देवी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि ख्वास जी के बाग में स्थित रामरघुनाथ जी महाराज का मंदिर बहुत पुराना और आस्था का केंद्र है। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि भू-माफिया इस जमीन को खुर्द-बुर्द कर रहे हैं और वहां अवैध रूप से प्लाटिंग की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन केवल मंदिर के कार्यों और धार्मिक आयोजनों के लिए ही सुरक्षित रहनी चाहिए।


एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, रखी ये मांगें

प्रदर्शन के बाद संघर्ष समिति ने जिला कलक्टर के नाम एसडीएम सीमा मीना को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने मुख्य रूप से तीन मांगें रखी हैं:

न्यायालय के फैसले का सम्मान: मंदिर की भूमि का मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए जब तक अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक वहां कोई पैमाइश या पत्थरगढ़ी (बाउंड्री) न की जाए।

कब्जे पर रोक: किसी भी बाहरी व्यक्ति या भू-माफिया को इस विवादित भूमि पर कब्जा न दिलवाया जाए।

यथास्थिति बरकरार रहे: भूमि पूरी तरह से मंदिर के कब्जे में ही रहनी चाहिए ताकि धार्मिक कार्यों में कोई बाधा न आए।

एसडीएम को ज्ञापन सौंपते समय भारी संख्या में महिलाएं भी मौजूद रहीं, जिन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मंदिर की जमीन को सुरक्षित नहीं किया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। फिलहाल प्रशासन ने ज्ञापन लेकर मामले की जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।