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सरिस्का के 1 से 10 किमी के दायरे में बिना अनुमति चल रहीं 22 से ज्यादा खानें

सरिस्का टाइगर रिजर्व सेंचुरी से 1 से 10 किमी के दायरे में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) की बिना अनुमति 22 से अधिक खानें चल रही हैं। इन पर एक्शन लेने के अधिकार खनि अभियंता व डीएफओ सरिस्का को दिए गए हैं, लेकिन ये दोनों अधिकारी एक-दूसरे पर मामला टाल रहे हैं।

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अलवर

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Umesh Sharma

Feb 28, 2026

अलवर. सरिस्का टाइगर रिजर्व सेंचुरी से 1 से 10 किमी के दायरे में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) की बिना अनुमति 22 से अधिक खानें चल रही हैं। इन पर एक्शन लेने के अधिकार खनि अभियंता व डीएफओ सरिस्का को दिए गए हैं, लेकिन ये दोनों अधिकारी एक-दूसरे पर मामला टाल रहे हैं। खनि अभियंता मनोज कहते हैं कि सरिस्का की रिपोर्ट पर वह खनन पर एक्शन लेते हैं। वहीं, डीएफओ अभिमन्यु सहारण कहते हैं कि वह दूरी का आंकलन करते हैं। एक्शन का कार्य खनि अभियंता का है। इस मामले में प्रशासन भी मौन है। एक्सपर्ट कहते हैं कि सरिस्का के संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट व सरकार ने समय-समय पर जो आदेश खनन प्रतिबंध पर लगाए हैं, उन पर कार्य जरूरी है। खनन के दौरान होने वाले विस्फोट व अन्य गतिविधियों से वन्यजीव प्रभावित होते हैं। ऐसे में 1 से 10 किमी के दायरे में खनन बंद होना चाहिए।
सरिस्का प्रशासन क्यों नहीं दे रहा रिपोर्ट?
खनन विभाग ने अलवर वन मंडल की रिपोर्ट के आधार पर एनबीडब्ल्यूएल के मानकों का पालन न करने पर एक खान को गुरुवार को बंद करा दिया। इसके बाद खान विभाग की कार्रवाई बिना एनबीडब्ल्यूएल के संचालित खानों पर होनी चाहिए थी, लेकिन नहीं की गई। खनन विभाग का तर्क है कि यदि इनकी रिपोर्ट भी सरिस्का प्रशासन देगा, तो एक्शन लिया जाएगा। अब सवाल खड़ा हो गया कि सरिस्का प्रशासन बिना एनबीडब्ल्यूएल के चल रही इन खानों की रिपोर्ट खान विभाग को क्यों नहीं दे रहा? यह खानें थानागाजी के झिरी व टहला में संचालित हैं।
खान विभाग व सरिस्का की जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट के गोदावर्मन केस के बाद सरकार ने आदेश जारी किए थे। उसी आधार पर राजस्थान स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने वर्ष 2022 में अपने क्षेत्रीय अधिकारियों को आदेश दिए, जिसमें साफ कहा गया है कि खनन इकाइयों के संचालन की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, प्रदेश सरकार की ओर से जारी किए गए आदेशों के अनुसार निर्णय लिए जाएं। इस सहमति पत्र की प्रति संबंधित खनन अभियंता और संभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) को इस टिप्पणी के साथ भेजी जाएगी कि यह सहमति केवल पर्यावरण के दृष्टिकोण से जारी की गई है। बाकी न्यायालय व अन्य आदेशों की पालना की जिम्मेदारी परियोजना प्रस्तावक और संबंधित विभागों की होगी। मालूम हो कि 1 से 10 किमी की दूरी में वही खानें चल सकती हैं, जिनके पास एनबीडब्ल्यूएल की एनओसी होगी।